पहला त्रुटि मोड वह है जहाँ JSON संरचना सही होने के बावजूद डेटा का अर्थ गलत होता है। उदाहरण के तौर पर, भुवनेश्वर में एक बस गलत दिशा में चलने के कारण दुर्घटना का कारण बना, जबकि बस का रूट मैप सही था। इसी प्रकार, यदि कोई प्रणाली केवल स्कीमा की जाँच करती है और डेटा की वास्तविकता को नहीं देखती, तो ऐसी त्रुटियाँ अनदेखी रह जाती हैं।
दूसरा मोड तब उत्पन्न होता है जब वैधता की जाँच केवल फॉर्मेट पर केंद्रित रहती है, न कि सामग्री की वैधता पर। गुजरात उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि केवल पंजीकरण से विवाह वैध नहीं माना जा सकता, यदि अनुष्ठानिक शर्तें पूरी न हों। इसी प्रकार, यदि JSON में सभी आवश्यक फ़ील्ड मौजूद हों, परन्तु उनका मान अनुपयुक्त या असंगत हो, तो प्रणाली को गलत परिणाम मिल सकते हैं।
तीसरा और सबसे गंभीर मोड वह है जहाँ डेटा में छिपी हुई असंगतियों को पहचानना कठिन हो जाता है, जैसे उत्तराखंड में आग की जाँच में पता चला कि फायर नॉर्टिस नहीं था। यदि आउटपुट में ऐसी असंगतियाँ हों, तो साधारण स्कीमा वैलिडेटर उन्हें नहीं पकड़ पाएगा। इसलिए, डेटा सत्यापन में बहु-स्तरीय जाँच, संदर्भात्मक विश्लेषण और वास्तविक दुनिया के उदाहरणों से तुलना आवश्यक है, ताकि ऐसी त्रुटियों को समय पर पहचाना जा सके।

