अमेरिकी सांसदों ने ट्रम्प प्रशासन की गुप्त निगरानी पर जांच की माँग की
ओरेगन के सीनेटर रॉन वाइडेन और वाशिंगटन के प्रतिनिधि प्रमिला जयपाल ने मंगलवार को सरकारी जवाबदेही कार्यालय को एक औपचारिक अनुरोध भेजा, जिसमें उन्होंने ट्रम्प प्रशासन द्वारा एक कम ज्ञात कानून के तहत पत्रकारों, गैर‑लाभकारी संस्थाओं और ट्रेड यूनियनों की जानकारी को बिना न्यायिक अनुमति के एकत्र करने की प्रक्रिया की जांच करने की माँग की। यह कदम तब आया है जब होमलैंड सुरक्षा विभाग ने कस्टम्स मामलों से जुड़े प्रशासनिक सम्मन जारी कर असामान्य रूप से बड़ी मात्रा में डेटा की माँग की थी, जिससे कई नागरिक समूहों में चिंता उत्पन्न हुई।
इस जांच की माँग को समझने के लिए पिछले कुछ महीनों की घटनाओं को देखना आवश्यक है। ओडिशा में नाबा दास की हत्या के बाद सीबीआई जांच की मांग फिर से उठी थी, जिससे सरकारी जवाबदेही और पारदर्शिता की आवश्यकता पर प्रकाश पड़ा। इसी प्रकार, ट्रम्प प्रशासन ने ईरान वार्ता को मध्य पूर्व में व्यापक शांति की दिशा में एक कदम बताया, जबकि कैलिफ़ोर्निया के तटीय एजेंसी पर पर्यावरणीय आतंक के आरोप लगाए, जिससे प्रशासनिक शक्ति के दुरुपयोग के प्रश्न उठे। इन सभी घटनाओं ने अमेरिकी सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर गहन जांच की मांग को सुदृढ़ किया।
जांच के परिणामस्वरूप यदि यह स्पष्ट हो जाता है कि ट्रम्प प्रशासन ने नागरिकों की निजता का उल्लंघन किया है, तो यह अमेरिकी लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों—स्वतंत्रता, पारदर्शिता और जवाबदेही—को पुनर्स्थापित करने में मदद करेगा। साथ ही, यह कदम अन्य देशों में भी सरकारी निगरानी के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है, जहाँ समान मुद्दे अक्सर अनदेखे रह जाते हैं। इस प्रकार, अमेरिकी कांग्रेस की यह पहल न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।