अन्नपूर्णा भण्डार विरोधी प्रदर्शन पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेताओं के द्वार तक पहुँचा
पश्चिम बंगाल के कई जिलों में अन्नपूर्णा भण्डार योजना के तहत भुगतान को दोगुना करने के बावजूद लाभार्थियों की संख्या में सात करोड़ की गिरावट ने महिलाओं को सड़कों और रेल पटरियों पर खड़ा कर दिया। उन्होंने बीडीओ कार्यालयों के बाहर जुलूस निकाला, जिससे स्थानीय यातायात बाधित हुआ और कई रेल सेवाओं में देरी हुई। इस प्रकार का सामुदायिक आंदोलन पहले कश्मीर मेडिकल कॉलेज द्वारा आयोजित पॉलियो टीका अभियान की तरह स्थानीय जनसंख्या की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।
त्रिनामूल कांग्रेस ने इस स्थिति को सरकार की झूठी वादाखोरी के रूप में उजागर किया और कहा कि योजना का वास्तविक लाभ गरीबों तक नहीं पहुँच रहा है। यह आरोप पिछले महीने त्रिनामूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच चुनाव आयोग तक पहुँचने वाले विवाद की याद दिलाता है, जहाँ पार्टी के भीतर सत्ता संघर्ष ने राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा को जन्म दिया था। इस संदर्भ में, अन्नपूर्णा भण्डार विरोध को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का नया मोड़ माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने इस विरोध को विपक्ष द्वारा साजिश समझते हुए कहा कि यह प्रदर्शन राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है और वास्तविक समस्याओं से दूर है। उन्होंने कहा कि सरकार ने योजना के लाभ को अधिकतम करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिकी, ईरानी और पाकिस्तानी नेताओं की स्विट्ज़रलैंड में वार्ता चल रही है, जो इस समय देश के भीतर की राजनीतिक अस्थिरता के विपरीत एक सकारात्मक संवाद का प्रतीक है।