अरुणाचल में १९ बाल तस्करी पीड़ित बचाए गए, तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया
अरुणाचल प्रदेश के लोअर डिबांग घाटी में सुरक्षा बलों ने एक गुप्त जांच के बाद उन्नीस बाल तस्करी के शिकार बच्चों को बचाया। इन बच्चों की आयु आठ वर्ष से कम थी और उन्हें बेहतर शिक्षा व देखभाल का झूठा वादा करके उनके अभिभावकों से अलग किया गया था। बचाए गए बच्चों को घरेलू काम और होटल‑संबंधी कार्यों में मजबूर किया जा रहा था, जिससे उनका शोषण स्पष्ट हो गया।
इस तस्करी जाल की साजिश में तीन महिलाओं को मुख्य दायित्वी माना गया और उन्हें गिरफ्तार किया गया। यह घटना पिछले कुछ महीनों में हुई कई घटनाओं से जुड़ी है, जैसे कि ऋण‑ग्रस्त परिवारों के बच्चों को अनुबंध‑आधारित काम में धकेलना और शहरों में नाबालिगों का तस्करी करना। इसी संदर्भ में, पिछले जून में दंबुक में राफ्ट उलटने से बचाए गए आठ लोगों और अभी भी फंसे तीन लोगों की स्थिति ने क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को उजागर किया।
मानव अधिकार संगठनों ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई और भारतीय सेना तथा स्थानीय प्रशासन से स्पष्टता की मांग की। ह्यूमन राइट्स ऑफ़ अरुणाचल (एचआरए) ने तस्करी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पीड़ित बच्चों के पुनर्वास के लिए विशेष उपायों की मांग की। साथ ही, तक्सिंग क्षेत्र में चीनी उपस्थिति के बारे में उठे सवालों ने सुरक्षा परिदृश्य को और जटिल बना दिया है, जिससे इस प्रकार के अपराधों को रोकने के लिए व्यापक रणनीति की आवश्यकता स्पष्ट हुई।