अस्थायी मेहमान
ओमार अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि कश्मीर में ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने वालों की शहादत को इसलिए नजरअंदाज किया जा रहा है क्योंकि वे मुसलमान थे, और ब्रिटिश अधिपत्य के तहत महाराजा एक गैर-मुसलमान था।
उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी की लड़ाई में शहीद हुए लोगों की याद को इस तरह से भुलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा है।
ओमार अब्दुल्ला ने सरकार से अपील की है कि वह शहीद दिवस पर प्रतिबंधों को हटाए और देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए काम करे। उन्होंने कहा कि हमें अपने देश की आजादी की लड़ाई में शहीद हुए लोगों की याद को कभी नहीं भूलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमें अपने देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि हमें अपने मतभेदों को भूलकर देश की एकता और अखंडता के लिए काम करना होगा।