अधिक वार्ड, वही कार्यबल: ग्रेटर बेंगलुरु एरिया और निगमों को जमीन पर कार्य करने में कठिनाइयाँ | Kashyap Sandesh
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अधिक वार्ड, वही कार्यबल: ग्रेटर बेंगलुरु एरिया और निगमों को जमीन पर कार्य करने में कठिनाइयाँ

R c Nishad(साहनी) · 30 अगस्त 2026

राज्य सरकार ने बृहत्त बेंगलुरु महानगर पालिका अधिनियम, २०२० को नया ग्रेटर बेंगलुरु शासन अधिनियम, २०२४ से बदल दिया, जिससे बीबीएमपी का विघटन कर पाँच निगम स्थापित किए गए और सम्पूर्ण शहर के लिये ग्रेटर बेंगलुरु एरिया (जीबीए) नामक एक पैन‑सिटी निकाय बनाया गया। यह परिवर्तन २ सितंबर २०२५ को लागू हुआ, परन्तु नई संरचना में अधिक वार्ड होने के बावजूद कार्यबल में कोई वृद्धि नहीं हुई, जिससे प्रशासनिक कार्यों में बाधाएँ उत्पन्न हो रही हैं।

पिछले वर्ष में एआई के तेज़ी से प्रसार के कारण विश्व स्तर पर एक लाख से अधिक तकनीकी नौकरियों का नुकसान हुआ, जिससे श्रमिक वर्ग में असुरक्षा बढ़ी। इसी संदर्भ में, जनरेशन ज़ी के युवा अब मिलेनियल्स की तुलना में अधिक वेतन कमा रहे हैं, परन्तु इस आर्थिक उछाल का लाभ केवल सीमित क्षेत्रों में ही दिख रहा है। बेंगलुरु के निगमों में कार्यबल की स्थिरता और कौशल विकास की कमी, इन व्यापक आर्थिक बदलावों के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही है।

सिगाची उद्योग विस्फोट के एक वर्ष बाद भी कई घायल श्रमिकों को स्वास्थ्य और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जबकि उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला है। यह सामाजिक असंतुलन बेंगलुरु के शहरी प्रशासन में भी परिलक्षित हो रहा है, जहाँ नई निगमों को कार्यस्थल सुधार और कर्मचारियों के कल्याण के लिये पर्याप्त संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं। इस प्रकार, अधिक वार्ड और वही कार्यबल की स्थिति न केवल प्रशासनिक दक्षता को घटा रही है, बल्कि श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक न्याय के प्रश्न को भी उजागर कर रही है।

स्रोत: The Hindu

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