भारतीय चाय संघ ने दार्जिलिंग व डूअर्स चाय उद्योग के पुनरुद्धार हेतु श्वेतपत्र जारी किया
भारतीय चाय संघ ने दार्जिलिंग चाय उद्योग की गिरती उत्पादन दर को लेकर एक विस्तृत श्वेतपत्र जारी किया है, जिसमें १९९० में १४.४९ मिलियन किलोग्राम उत्पादन से लेकर २०२५ में केवल ५.६ मिलियन किलोग्राम तक की गिरावट को आँकड़ों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस गिरावट के कारणों में जलवायु परिवर्तन, बागान प्रबंधन की कमी और निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धा का बढ़ना शामिल है। संघ ने इस समस्या के समाधान हेतु सरकारी समर्थन, आधुनिक बागान तकनीक और निर्यात को बढ़ावा देने की मांग की है।
डूअर्स‑तेराई क्षेत्र में छोटे चाय किसानों और बड़े संगठित बागानों के बीच बाजार असंतुलन स्पष्ट रूप से दिख रहा है। श्वेतपत्र में बताया गया है कि छोटे किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी आय में गिरावट आई है। इस संदर्भ में, संघ ने वित्तीय सहायता, सामूहिक विपणन मंच और तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से छोटे किसानों को सशक्त बनाने की योजना प्रस्तुत की है। यह पहल पिछले दिनों के स्वास्थ्य क्षेत्र की खबरों में डॉक्टरों द्वारा पेंशन आयु बढ़ाने के विरोध के समान सामाजिक हितों को संतुलित करने की आवश्यकता को दर्शाती है।
संघ ने पुनरुद्धार पैकेज के रूप में उत्पादन वृद्धि, निर्यात विस्तार और ब्रांडिंग को प्रमुख बिंदु बनाया है। इसमें विशेष रूप से दार्जिलिंग की विशिष्टता को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने के लिए प्रमाणपत्र प्रणाली और डूअर्स‑तेराई के लिए नई बाजार रणनीतियों का प्रस्ताव है। इस श्वेतपत्र को तैयार करने में अंतर्राष्ट्रीय खेल संघ की विवाद समाधान प्रक्रिया से प्रेरणा ली गई, जहाँ विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय आवश्यक था। अंततः, यह दस्तावेज़ चाय उद्योग को स्थायी विकास की दिशा में ले जाने के लिए नीति निर्माताओं, किसानों और निर्यातकों के सहयोग की अपील करता है।