बर्मा का तीखा व्यंजन मद्रास में अपनाया गया | Kashyap Sandesh
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बर्मा का तीखा व्यंजन मद्रास में अपनाया गया

R c Nishad(साहनी) · 30 अगस्त 2026

अथो वह तीखा व्यंजन है जो बर्मा से भारत लौटे प्रवासियों ने अपने नए घर मद्रास में लाया। स्वतंत्रता के बाद बर्मा में रहने वाले कई भारतीयों ने अपने साथ इस पारम्परिक पकवान को भी साथ ले आया, जिससे वे अपने पूर्वजों की यादों और संस्कृति से जुड़े रहे। मद्रास के स्थानीय लोगों ने इस स्वाद को अपनाया और धीरे‑धीरे यह शहर के भोजन परम्पराओं में सम्मिलित हो गया।

भोजन का यह सांस्कृतिक पुल कई अन्य घटनाओं से तुलना किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, बिहार में पारम्परिक फेंसा व्यंजन से हुई खाद्य विषाक्तता की खबर ने दिखाया कि परम्परागत भोजन में सावधानी आवश्यक है, जबकि अथो ने सुरक्षित रूप से अपनी पहचान बनाई। इसी प्रकार, हैती के समर्थकों और स्कॉटलैंड के किल्ट पहनने वाले प्रशंसकों ने विश्व कप में सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को उजागर किया, जो दर्शाता है कि भोजन और खेल दोनों ही लोगों को उनके मूल से जोड़ते हैं।

आज मद्रास के कई रेस्तरां में अथो को विशेष मेन्यू में रखा जाता है, जहाँ यह न केवल स्वाद का आनंद देता है बल्कि प्रवासियों की सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करता है। मनिपुर में कुकि राष्ट्रीय सेना‑बर्मा के संदिग्ध कर्मियों द्वारा घरों को जलाने की घटना ने विस्थापन की पीड़ा को उजागर किया, परन्तु ऐसे व्यंजन लोगों को अपनी पहचान और इतिहास से जोड़ने का साधन बनते हैं। अतः अथो न केवल एक स्वादिष्ट व्यंजन है, बल्कि यह प्रवासियों के लिए अतीत और वर्तमान के बीच एक पुल का कार्य करता है।

स्रोत: The Hindu

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