ब्रिटेन में ऊर्जा मूल्य सीमा में वृद्धि से इस सर्दी घरों के बिल में चार प्रतिशत बढ़ोतरी की संभावना
ब्रिटेन में ऊर्जा मूल्य सीमा का पुनरावलोकन इस शीतकाल में घरों के ऊर्जा बिल को तीन साल के उच्चतम स्तर पर ले जाने की संभावना को दर्शाता है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण तेल और गैस की कीमतों में तेज़ी आई है, जिससे सरकार को मौजूदा सीमा को चार प्रतिशत बढ़ाना पड़ा। इस वृद्धि से वार्षिक औसत बिल लगभग एक हज़ार सात सौ उनतीस पाउंड तक पहुँच सकता है, जो कई परिवारों के बजट पर भारी बोझ डाल सकता है।
पिछले महीनों में ब्रिटेन में ऊर्जा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई, जिससे एंडी बर्नहैम द्वारा लागू की गई बिजली पर वैट कटौती का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो रहा है। कॉर्नवॉल इन्साइट के विश्लेषण के अनुसार, इस नई सीमा के कारण कई मध्यम आय वर्ग के घरों को अपने आय का दस प्रतिशत से अधिक ऊर्जा पर खर्च करना पड़ेगा। यह स्थिति पहले ही कई सामाजिक संगठनों द्वारा ऊर्जा गरीबी के बढ़ते जोखिम के रूप में पहचानी गई है।
वित्तीय स्थिरता को लेकर चिंतित विशेषज्ञों ने कहा है कि इस बढ़ोतरी से ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ेगा। भारतीय अर्थव्यवस्था में ऊर्जा कीमतों के उतार-चढ़ाव से जुड़ी हालिया रिपोर्टों ने दिखाया है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता कई देशों को प्रभावित कर रही है। इसलिए, ब्रिटेन में इस सीमा वृद्धि को केवल घरेलू स्तर पर नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक परिप्रेक्ष्य में भी समझना आवश्यक है।