चीन ने पेसिफिक द्वीप फ़ोरम में ताइवान की भागीदारी पर चेतावनी जारी की
पैलाउ में आयोजित पेसिफिक द्वीप फ़ोरम के उद्घाटन समारोह में ताइवान के प्रतिनिधियों की भागीदारी ने चीन को गहरा असंतोष दिलाया। चीन ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह इस कदम को अपने संप्रभु अधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखता है और भविष्य में ऐसे कार्यों के परिणामस्वरूप "परिणाम" हो सकते हैं। इस चेतावनी के पीछे चीन की ताइवान को अपने क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा मानने की नीति निहित है, जिसे वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर दृढ़ता से रक्षित करना चाहता है।
फ़ोरम में उपस्थित ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड ने इस मुद्दे को एक अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में प्रस्तुत किया, जहाँ प्रत्येक राष्ट्र की भागीदारी को समान रूप से मान्यता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि फ़ोरम का उद्देश्य क्षेत्रीय एकता को सुदृढ़ करना है, न कि किसी एक देश के दबाव को बढ़ावा देना। इस बीच, पिछले हफ्तों में अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान को स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर हमले के बाद चेतावनी जारी करने जैसी घटनाएँ भी वैश्विक तनाव को बढ़ा रही थीं, जिससे इस फ़ोरम की महत्ता और भी स्पष्ट हो गई।
इसी समय, अंतरराष्ट्रीय नवाचार परिषद ने ताइवान को केंद्र बनाकर "एक्सप्लोर टू एक्सपैंड ताइवान" पहल शुरू की, जिसका उद्देश्य वैश्विक नवाचार और व्यापार साझेदारियों को बढ़ावा देना है। साथ ही, भारत ने हाल ही में बाजार पूंजीकरण में ताइवान को पीछे छोड़ते हुए पाँचवें स्थान पर कब्ज़ा किया, जिससे आर्थिक प्रतिस्पर्धा में नई गतिशीलता आई है। इन सभी घटनाओं ने पेसिफिक द्वीप फ़ोरम को न केवल सुरक्षा बल्कि आर्थिक और तकनीकी सहयोग के मंच के रूप में पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता को उजागर किया है।