चेन्नई के दूसरे हवाई अड्डे का भविष्य: विकल्प और चुनौतियाँ
परंदुर हवाई अड्डे के बंद होने के बाद तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई के दूसरे हवाई अड्डे के लिए दो संभावित स्थलों को प्रमुखता से उभारा है। चेय्यूर, जो चेंगलपट्टु जिले में स्थित है, और गुम्मिडीपुंडी, तिरुवल्लूर जिले में स्थित, दोनों ही क्षेत्रों में पर्याप्त भूमि उपलब्धता और उद्योगिक केंद्रों के निकटता के कारण चयनित किए गए हैं। इन स्थानों की जाँच में पर्यावरणीय प्रभाव, सामाजिक स्वीकृति और आर्थिक लाभ को प्रमुख मानदंड माना जा रहा है।
पिछले वर्षों में समान विकास के सिद्धांत को लागू करने की मांग कई बार उठाई गई थी, विशेषकर जब चेन्नई को 2028 तक दूसरा हवाई अड्डा न मिलने की संभावना पर चर्चा हुई थी। इस सिद्धांत के तहत राज्य को न केवल शहरी क्षेत्रों, बल्कि आसपास के औद्योगिक और ग्रामीण क्षेत्रों को भी समान अवसर प्रदान करना चाहिए। इसलिए, नई बुनियादी संरचना के चयन में स्थानीय समुदायों की भागीदारी और उनके हितों का संरक्षण अनिवार्य माना जा रहा है।
वहीं, हाल ही में यूरोप में तीव्र तूफानों ने हवाई यात्रा में बड़े पैमाने पर व्यवधान पैदा किया, जिससे नई हवाई अड्डे की सुरक्षा और लचीलापन पर सवाल उठे हैं। इस अनुभव से सीख लेकर तमिलनाडु को अपने हवाई अड्डे के डिजाइन में मौसम‑संबंधी जोखिमों को कम करने के उपाय शामिल करने चाहिए। साथ ही, चयन प्रक्रिया को पारदर्शी, समयबद्ध और न्यायसंगत बनाकर 2028 तक दोहरा हवाई अड्डा तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाना आवश्यक है।