Gold ETF पर बड़ी रोक: विदेशी मुद्रा संकट के बीच बड़े निवेशकों पर म्यूचुअल फंड हाउस की सख्ती
पश्चिम एशिया युद्ध के असर से बढ़ा दबाव, HDFC, ICICI, Nippon और Tata MF ने लगाए प्रतिबंध
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते गोल्ड इंपोर्ट बिल के बीच देश की कई प्रमुख म्यूचुअल फंड कंपनियों ने अपने गोल्ड ETF (Exchange Traded Fund) और गोल्ड फंड ऑफ फंड्स (FoF) में बड़े निवेश पर अस्थायी रोक लगा दी है। इस कदम का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) पर बढ़ते दबाव को कम करना और सोने के आयात को नियंत्रित करना बताया जा रहा है।
देश की प्रमुख एसेट मैनेजमेंट कंपनियों HDFC Mutual Fund, ICICI Prudential Mutual Fund, Nippon India Mutual Fund और Tata Mutual Fund ने 5 जून से 8 जून के बीच अपने गोल्ड ETF में बड़े निवेश पर प्रतिबंध लागू कर दिए हैं।
बड़े निवेशकों पर असर, SIP जारी
ICICI Prudential Mutual Fund ने जारी नोटिस में कहा है कि 5 जून 2026 के बाजार बंद होने के बाद से Gold ETF में 25 करोड़ रुपये से अधिक के नए निवेश स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसी तरह अन्य फंड हाउसों ने भी बड़े निवेश पर अस्थायी रोक लगाई है।
हालांकि आम निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि SIP, रिडेम्प्शन और छोटे निवेशों पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। ये प्रतिबंध मुख्य रूप से संस्थागत और हाई नेटवर्थ निवेशकों (HNIs) को प्रभावित करेंगे।
आखिर क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
SEBI के नियमों के मुताबिक गोल्ड ETF को अपनी कुल संपत्ति का कम से कम 95 प्रतिशत हिस्सा भौतिक सोने और सोने से जुड़े अनुमोदित साधनों में निवेश करना होता है। इसका मतलब है कि ETF में जितना अधिक पैसा आएगा, उतना अधिक सोना खरीदना पड़ेगा, जिससे देश का आयात बिल बढ़ेगा।
पश्चिम एशिया में युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के कारण सोने की मांग लगातार बढ़ रही है। निवेशक इसे सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) मानकर बड़ी मात्रा में खरीद रहे हैं।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा गोल्ड इंपोर्ट
RBI के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 तिमाही में भारत का गोल्ड इंपोर्ट बिल 22.57 अरब डॉलर तक पहुंच गया। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 71.97 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 58 अरब डॉलर था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने का आयात इसी गति से बढ़ता रहा तो इसका असर देश के चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) और रुपये की स्थिरता पर पड़ सकता है।
मोदी सरकार ने भी की थी अपील
पिछले महीने प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से पश्चिम एशिया संकट के बीच ईंधन की बचत, सोने के आयात में कमी और विदेशी मुद्रा की सुरक्षा में सहयोग करने की अपील की थी।
सरकार का मानना है कि वैश्विक अस्थिरता के दौर में गैर-जरूरी आयात को सीमित करना आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी है।
विशेषज्ञों ने फैसले का किया समर्थन
वेल्थ मैनेजमेंट फर्म आनंद राठी वेल्थ के जॉइंट CEO फिरोज अज़ीज़ ने इन प्रतिबंधों को "जिम्मेदार कदम" बताया है।
उनके अनुसार भारत के परिवारों के पास लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर मूल्य का सोना मौजूद है। यदि इस सोने का सिर्फ 1% से 1.5% हिस्सा भी बाजार में वापस आता है तो देश के विदेशी मुद्रा संतुलन और चालू खाते के घाटे पर बड़ा सकारात्मक असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा ऊंचे दामों पर निवेशकों को सोना खरीदने के बजाय अपने निष्क्रिय गोल्ड होल्डिंग्स का कुछ हिस्सा बेचने पर भी विचार करना चाहिए।
क्या अब गोल्ड ETF में निवेश घटेगा?
जनवरी 2026 में गोल्ड ETF में निवेश रिकॉर्ड 24,040 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। पहली बार गोल्ड ETF में निवेश ने इक्विटी फंड्स को भी पीछे छोड़ दिया था।
हालांकि बाद के महीनों में यह निवेश घटकर 2,000 करोड़ से 4,000 करोड़ रुपये प्रति माह के स्तर पर आ गया।
फंड मैनेजरों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया संकट जल्द खत्म नहीं हुआ तो गोल्ड ETF में इस तरह के प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रह सकते हैं। इससे संस्थागत निवेशकों की मांग में कमी देखने को मिल सकती है।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
1. SIP निवेश जारी रहेगा।
2. छोटे निवेशकों पर कोई असर नहीं।
3. बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए सीमाएं लागू।
4. गोल्ड ETF में नई बड़ी रकम लगाने वालों को इंतजार करना पड़ सकता है।
5. पश्चिम एशिया संकट और डॉलर की मजबूती आगे की दिशा तय करेंगे।
निष्कर्ष
भारत में बढ़ते गोल्ड इंपोर्ट और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव को देखते हुए म्यूचुअल फंड उद्योग ने एक असामान्य लेकिन महत्वपूर्ण कदम उठाया है। फिलहाल यह प्रतिबंध बड़े निवेशकों तक सीमित है, लेकिन यदि वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं तो सरकार और वित्तीय संस्थाएं सोने में निवेश को लेकर और सख्त कदम उठा सकती हैं।