ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों के विस्तार के बाद प्रतिशोध का वचन दिया
अमेरिकी वित्त विभाग ने ६० व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाज़ों पर नए प्रतिबंध लागू किए, परन्तु सूची में चीन के उन वित्तीय संस्थानों का उल्लेख नहीं किया गया जो ईरान के तेल निर्यात को आसान बनाने में संलिप्त माने जाते थे। यह कदम ईरान के लिए एक बड़ी चुनौती प्रस्तुत करता है, क्योंकि वह अपने तेल आय के प्रमुख स्रोतों में से एक को सीमित करने की कोशिश कर रहा है।
ईरान ने इस विकास के प्रत्युत्तर में प्रतिशोध करने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव की स्थिति और अधिक तीव्र हो सकती है। इस घोषणा के पीछे ईरान की यह भावना है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी संभावित उपाय अपनाएगा, चाहे वह आर्थिक दबाव हो या कूटनीतिक उपाय।
पिछले कुछ हफ्तों में यूरोपीय संघ ने भी ईरान के परमाणु समझौते के औपचारिक रूप से पूरा होने तक प्रमुख प्रतिबंध हटाने से इनकार किया था, जबकि संयुक्त राज्य ने भारत की चार कंपनियों को रूस‑संबंधी प्रतिबंध सूची से हटा दिया था। इन घटनाओं ने वैश्विक आर्थिक और राजनैतिक समीकरणों को जटिल बना दिया है, जहाँ प्रत्येक कदम का प्रभाव कई देशों की नीतियों पर पड़ता है।