इरान ने विदेशी मीडिया से संपर्क को आपराधिक बनाने की योजना, नागरिक स्वतंत्रता पर नई दहलीज
इरान के संसद सदस्यों ने इस महीने एक विधेयक पर विचार किया है, जिसमें विदेशी समाचार एजेंसियों या अंतरराष्ट्रीय मीडिया के साथ किसी भी प्रकार का संवाद आपराधिक माना जाएगा। यदि यह कानून पारित हो जाता है, तो पत्रकारों को विदेशी समाचार संस्थानों को रिपोर्ट भेजने या साक्षात्कार देने पर सजा का सामना करना पड़ेगा, और साधारण नागरिकों को भी विदेशियों के साथ संवाद करने पर कानूनी कार्रवाई का जोखिम रहेगा। इस प्रस्ताव का उद्देश्य सरकार को आलोचना करने वाले आवाज़ों को रोकना और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर सूचना प्रवाह को नियंत्रित करना बताया गया है।
यह कदम इरान की हालिया कूटनीतिक और आर्थिक चुनौतियों के बीच आया है। पिछले जुलाई में इरान ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में एक विदेशी कंटेनर जहाज़ को रोकने के बाद समुद्री मार्गों को नियंत्रित करने की घोषणा की थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बाधा उत्पन्न हुई। इसी समय यूके ने सोशल मीडिया पर न्यूनतम आयु सीमा लागू करने की नीति अपनाई, जबकि बड़ी तकनीकी कंपनियों ने इस प्रतिबंध के खिलाफ वैश्विक स्तर पर लड़ाई लड़ी। इन घटनाओं ने इरान को अपने भीतर सूचना नियंत्रण को सख्त करने के लिए प्रेरित किया है।
मानवाधिकार संगठनों ने इस प्रस्ताव को “शीतल” और “लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध” कहा है, और चेतावनी दी है कि यह कानून नागरिक सहभागिता को सुरक्षा अपराध में बदल देगा। यदि लागू हो गया, तो जनवरी में हुए बड़े विरोध प्रदर्शन की कवरेज भी सीमित हो जाएगी, जिससे जनता को वास्तविक स्थिति से वंचित किया जा सकेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इरान को इस दिशा में कदम उठाने से रोकने की अपील की है, क्योंकि यह न केवल प्रेस की स्वतंत्रता को खतरे में डालता है, बल्कि वैश्विक संवाद को भी बाधित करता है।