किम जोंग‑उन की बहन ने ट्रम्प के अमेरिकी‑कोरियाई गुप्त वार्ता के दावे पर सवाल उठाए
अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में कहा कि वह इस वर्ष उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग‑उन से मुलाकात करने की योजना बना रहे हैं, और यह भी दावा किया कि दोनों पक्षों के बीच गुप्त वार्ता चल रही है। इस पर किम जोंग‑उन की छोटी बहन किम यो‑जोंग ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वाशिंगटन अभी भी प्योंगयांग का शत्रु ही है और ऐसे किसी संवाद का कोई प्रमाण नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी दावे केवल राजनीतिक दिखावा हैं, जिससे दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी स्पष्ट होती है।
किम जोंग‑उन ने पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय मंच पर कहा था कि उत्तर कोरिया को एक परमाणु राज्य के रूप में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करना ही अनिश्चित विश्व परिस्थितियों से निपटने का एकमात्र उपाय है। यह बयान किम यो‑जोंग के शब्दों के साथ टकराव में आया, क्योंकि उन्होंने कहा कि अमेरिकी नीतियों में बदलाव के बिना कोई वास्तविक संवाद संभव नहीं है। इस बीच, शिलांग में 'का बोस जोंग न्गी' सार्वजनिक बस योजना के विस्तार की घोषणा हुई, जो क्षेत्रीय बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने के प्रयासों को दर्शाती है, परन्तु उत्तर कोरियाई कूटनीति में इस तरह के विकासात्मक कदमों का प्रभाव सीमित ही दिखता है।
पिछले दिनों ओडिशा के बालासोर में एक डम्पर ट्रक और मोटरसाइकिल के टकराव से हुई दुखद घटना ने भी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और बुनियादी ढाँचे की कमजोरियों को उजागर किया। इस प्रकार के घटनाक्रमों के बीच किम यो‑जोंग का यह बयान अंतरराष्ट्रीय समुदाय में यह प्रश्न उठाता है कि क्या वास्तविक संवाद की कोई संभावना है या केवल बयानबाजी ही शेष है। वर्तमान में इस मुद्दे की महत्ता को देखते हुए, दोनों पक्षों को ठोस कदम उठाकर विश्वास निर्माण करना आवश्यक है, अन्यथा कूटनीतिक प्रगति केवल एक भ्रम बनी रहेगी।