केरल के एरुमेली में कचरा समस्या ने वन किनारों को बना दिया संकटग्रस्त
केरल के एरुमेली में कचरा समस्या ने हाल ही में गंभीर रूप ले लिया है। प्लास्टिक की थैलियों, खाद्य अपशिष्ट और अन्य कचरे के ढेर अब वन की सीमाओं के साथ-साथ फैले हुए हैं, जिससे न केवल दृश्यात्मक रूप से बुरा प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि वन्यजीवों के आवास में भी बाधा उत्पन्न हो रही है। इस क्षेत्र में कई स्थानीय लोग बताते हैं कि कुत्ते और अन्य जंगली जानवर कचरे में पाई गई बासी वस्तुओं को खाने के कारण बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।
पिछले कुछ महीनों में, ओडिशा के रौरकेला में बढ़ते कुत्ते के हमले और हैदराबाद में निर्माण-ध्वंस कचरे के खुले में फेंके जाने की घटनाओं ने इस समस्या की गंभीरता को उजागर किया है। इन घटनाओं ने दिखाया है कि कचरा प्रबंधन की विफलता न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पर्यावरणीय संकट को जन्म देती है। एरुमेली में भी इसी तरह की लापरवाही के कारण कचरे का अनियंत्रित संचय हो रहा है, जिससे जल स्रोतों का प्रदूषण और वन की जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
स्थानीय प्रशासन को अब त्वरित उपाय करने की आवश्यकता है। कचरा संग्रहण के लिए नियमित ट्रकों की व्यवस्था, पुनर्चक्रण केंद्रों की स्थापना और सार्वजनिक जागरूकता अभियानों को तेज़ी से लागू किया जाना चाहिए। साथ ही, वन संरक्षण विभाग को कचरे की निगरानी के लिए विशेष टीमें बनानी चाहिए, ताकि कचरे की अनधिकृत निकासी को रोका जा सके। यदि इन कदमों को तुरंत लागू किया गया तो एरुमेली के वन किनारे फिर से स्वच्छ और सुरक्षित बन सकते हैं, और भविष्य में ऐसी ही समस्याओं से बचा जा सकता है।