कीट और मकड़ी पारिस्थितिकी तंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी, धारवाड़ में विशेषज्ञों ने कहा
धारवाड़ में आयोजित एक विशेष व्याख्यान श्रृंखला में एशान पहाडे, जो पुणे स्थित इंटर्मोन संस्थान के संस्थापक निदेशक हैं, ने कहा कि कीट और मकड़ी पारिस्थितिकी तंत्र के मूलभूत कड़ी हैं। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से किए गए सर्वेक्षण और दस्तावेजीकरण से इन जीवों के महत्व को समझना आसान हो जाता है और यह वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए एक ठोस आधार बनता है। इस प्रकार के सहयोग से न केवल जैव विविधता की रक्षा होती है, बल्कि ग्रामीण समुदायों को भी आर्थिक लाभ मिलता है।
पिछले महीने परागण करने वाली बिना डंक वाली मधुमक्खियों को परु में कानूनी अधिकार मिलने की खबर ने विश्व भर में कीटों के संरक्षण के महत्व को उजागर किया। इस precedent को देखते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में भी समान कदम उठाकर कीटों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए। ऐसे अधिकारों से इन जीवों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा, जिससे वे फल‑फूल की परागण में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे और कृषि उत्पादन में सुधार होगा।
वित्तीय विशेषज्ञों ने बताया कि कर सुधार और पारदर्शिता से वैश्विक पूँजी भारत की ओर आकर्षित हो रही है, और यह पूँजी पर्यावरणीय परियोजनाओं में निवेश करने के लिए तैयार है। साथ ही, संयुक्त राज्य में खेल‑प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम ने नवाचार को व्यावसायिक अवसरों में बदलने का उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो भारत में भी विज्ञान‑प्रौद्योगिकी और जैव विविधता के संगम से संभव हो सकता है। इस प्रकार, कीट और मकड़ी के संरक्षण को आर्थिक विकास के साथ जोड़कर एक सतत भविष्य की राह प्रशस्त की जा सकती है।