खजाना बांड संकट: क्या यह अमेरिका के सुरक्षित शरणस्थल के रूप में पतन का संकेत है?
खजाना सचिव स्कॉट बेस्टेंट ने घोषणा की कि सरकार अपने बांड खरीद कार्यक्रम को तीव्रता से बढ़ाएगी, ताकि बांडों की कीमतें बढ़ें और उनके प्रतिफल (ब्याज दर) घटें। यह कदम अमेरिकी वित्तीय बाजार को स्थिर करने और निवेशकों को आश्वस्त करने के उद्देश्य से उठाया गया था। परंतु बाजार ने तुरंत प्रतिक्रिया दी, और बांड की यील्ड में गिरावट केवल अल्पकालिक रही।
दस साल के खजाना बांड की यील्ड शुक्रवार दोपहर तक फिर से अपने पूर्व स्तर के करीब पहुँच गई, जबकि तीस साल के बांड की यील्ड दो दशकों के उच्चतम स्तर पर बनी रही। इस अस्थिरता ने ट्रम्प प्रशासन को आर्थिक दबाव में डाल दिया, क्योंकि बांड बाजार की अस्थिरता को लेकर निवेशकों की चिंताएँ बढ़ रही थीं। इसी दौरान, अमेरिकी खजाना विभाग ने तेल और गैस कंपनियों को कीमतें घटाने की चेतावनी भी दी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि व्यापक आर्थिक चुनौतियों का सामना सरकार कर रही है।
इन घटनाओं को देखते हुए, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता स्पष्ट हो रही है। पिछले कुछ दिनों में जम्मू और कश्मीर के प्रमुख नेताओं ने सामाजिक कार्यकर्ताओं के निधन पर शोक व्यक्त किया, जिससे क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ा है। इस पृष्ठभूमि में, अमेरिकी बांड बाजार की अस्थिरता यह सवाल उठाती है कि क्या अमेरिका अपने सुरक्षित शरणस्थल की प्रतिष्ठा को बनाए रख पाएगा, या यह नई आर्थिक चुनौतियों के कारण कमजोर पड़ जाएगा।