नागरिकता का निर्णय न्यायपूर्ण और तर्कसंगत प्रक्रिया से ही होना चाहिए: सर्वोच्च न्यायालय | Kashyap Sandesh
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नागरिकता का निर्णय न्यायपूर्ण और तर्कसंगत प्रक्रिया से ही होना चाहिए: सर्वोच्च न्यायालय

R. C. Nishad · 13 जुलाई 2026

सर्वोच्च न्यायालय ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के 27 निर्णयों को पलट दिया है, जिसमें विदेशियों के मामले शामिल हैं। न्यायालय ने कहा है कि ट्रिब्यूनलों को फिर से विचार करना होगा और ऐसे निर्णय स्थायी नहीं हो सकते हैं यदि 'कार्यवाही में मानसिक प्रयोग की कमी है, या यह एकतरफ़ा और स्वचालित है।' न्यायालय ने यह भी कहा है कि नागरिकता का निर्णय न्यायपूर्ण और तर्कसंगत प्रक्रिया से ही होना चाहिए। यह निर्णय नागरिकता के मामलों में न्यायपूर्ण और संवैधानिक तरीके से निर्णय लेने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय से नागरिकता के मामलों में न्यायपूर्ण और संवैधानिक तरीके से निर्णय लेने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इससे पहले, गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने कई मामलों में विदेशियों को नागरिकता देने के निर्णय लिए थे, जिनमें से कई निर्णयों को सर्वोच्च न्यायालय ने पलट दिया है। न्यायालय ने कहा है कि नागरिकता का निर्णय न्यायपूर्ण और तर्कसंगत प्रक्रिया से ही होना चाहिए और ऐसे निर्णय स्थायी नहीं हो सकते हैं यदि 'कार्यवाही में मानसिक प्रयोग की कमी है, या यह एकतरफ़ा और स्वचालित है।

इस निर्णय से नागरिकता के मामलों में न्यायपूर्ण और संवैधानिक तरीके से निर्णय लेने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इससे नागरिकता के मामलों में न्यायपूर्ण और संवैधानिक तरीके से निर्णय लेने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। न्यायालय ने कहा है कि नागरिकता का निर्णय न्यायपूर्ण और तर्कसंगत प्रक्रिया से ही होना चाहिए और ऐसे निर्णय स्थायी नहीं हो सकते हैं यदि 'कार्यवाही में मानसिक प्रयोग की कमी है, या यह एकतरफ़ा और स्वचालित है।'

स्रोत: The Hindu

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