सितंबर में MHA‑लद्दाख वार्ता से पहले, केंद्र की पहल से लेह के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को वापस लेने की मांग
लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने इस सप्ताह प्रशासन को एक विस्तृत माँगों की सूची सौंपी, जिसमें सबसे प्रमुख बात स्थानीय प्रदर्शनकारियों के खिलाफ चल रहे सभी मामलों को रद्द करने की थी। यह मांग सितंबर में गृह मंत्रालय (MHA) की लद्दाख टीम के साथ होने वाली अनौपचारिक वार्ताओं से ठीक पहले रखी गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नागरिक समाज समूह केंद्र से ठोस कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।
पिछले महीने लद्दाख में कई महत्वपूर्ण घटनाएँ घटीं। 1 जुलाई को नागरिक समाज समूहों ने MHA टीम के साथ अनौपचारिक बातचीत का आयोजन किया, जहाँ उन्होंने मई 22 को हुए समझौते पर केंद्र के पीछे हटने का आरोप लगाया। इसके बाद 21 जून को लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने 23 जून को लद्दाख-व्यापी बंद का आह्वान किया, जिसमें केंद्र के ‘गुमशुदा’ मसौदे और नई नीति को लेकर गहरी असंतुष्टि व्यक्त की गई।
इन घटनाओं के प्रकाश में, अब केंद्र की ओर से मामलों को वापस लेने की पहल को एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। लद्दाख के बौद्ध संघ के अध्यक्ष त्सेरिंग डॉर्जे लाकरूक ने कहा कि यह कदम केंद्र की प्रतिबद्धताओं को कमजोर करने की कोशिश को रोक सकता है। यदि यह पहल सफल रहती है, तो यह आगामी MHA‑लद्दाख वार्ता को अधिक रचनात्मक दिशा दे सकती है और लद्दाख में शांति व विकास की राह को सुदृढ़ कर सकती है।