तिब्बत में बाढ़ की वास्तविकता को चीन छुपा रहा, अभियानकारियों का आरोप
तिब्बत में पिछले सप्ताह आई विनाशकारी बाढ़ ने कई गाँवों को तहस‑नहस कर दिया, लेकिन चीन की आधिकारिक रिपोर्ट में केवल सीमित नुकसान का उल्लेख किया गया है। तिब्बती अभियानकारियों का कहना है कि इस बाढ़ में लगभग तीन सौ घर नष्ट हुए और कई लोगों का पता नहीं चल पाया, जो सरकार द्वारा स्वीकार किए गए आंकड़ों से बहुत अधिक है। उन्होंने यह भी बताया कि बाढ़ के बाद सार्वजनिक चर्चा पर कड़ी रोक लगाई गई, जिससे स्थानीय लोगों को अपनी पीड़ा व्यक्त करने से रोका गया।
तिब्बत में सूचना प्रतिबंध के तहत सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने कम से कम दस व्यक्तियों को झूठी आपदा सूचना फैलाने के लिए दंडित किया। दंड के स्वरूप के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या यह दमनात्मक कदम जनता को सच बताने से रोकने के लिए उठाया गया है। इस प्रकार की कार्रवाई ने अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की नज़र में चीन की पारदर्शिता और जवाबदेही को और अधिक प्रश्नवाचक बना दिया है।
पिछले कुछ हफ्तों में चीन ने पाकिस्तान के साथ समुद्री मार्ग और भारत के साथ नई सीमा गलियारा की योजनाएँ घोषित की हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहा है। इन आर्थिक परियोजनाओं के बीच तिब्बती बाढ़ जैसी मानवीय आपदा को कम करके दिखाने की कोशिश को कई विश्लेषकों ने चीन की रणनीतिक प्राथमिकताओं के साथ जोड़कर देखा है। तिब्बती लोगों की पीड़ा को अनदेखा कर आर्थिक विस्तार को आगे बढ़ाने की यह नीति अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में आलोचना का कारण बन रही है।