दिल्ली उच्च न्यायालय ने सामाजिक मीडिया उपयोगकर्ता को ‘अवमाननात्मक’ वीडियो के लिए शो‑कार्स नोटिस जारी किया
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो न्यायाधीशों की बेंच द्वारा सामाजिक मीडिया उपयोगकर्ता को शो‑कार्स नोटिस जारी किया, क्योंकि उसने ऐसे वीडियो प्रकाशित किए जो न्यायालय के प्रति अपमानजनक माने गए। न्यायालय ने पहले ८ जून को सभी प्रमुख सामाजिक मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को आदेश दिया था कि वे इस उपयोगकर्ता के खाते और हैंडल को ब्लॉक कर दें, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में बाधा न आए। इस निर्णय के बाद, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि उपयोगकर्ता ने अपने कार्यों को सुधारने में विफलता दिखाई तो आगे की सज़ा भी हो सकती है।
यह कदम हाल ही में आई डिजिटल नियमन की व्यापक प्रवृत्ति से जुड़ा है। नई दिल्ली के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने व्हाट्सएप को नोटिस भेजने के बाद टेलीग्राम और सिग्नल को भी समान नोटिस जारी किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर अनुचित सामग्री को रोकने के लिए सक्रिय है। इसी प्रकार, तेलंगाना कांग्रेस ने अपने सदस्य कत्ती वेंकट स्वामी को शोक‑कारण नोटिस भेजा, जिसमें उन्होंने राजनीतिक टिप्पणी के बाद उत्पन्न असंतोष को लेकर चेतावनी दी थी। इन सभी घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि विभिन्न संस्थाएँ अब डिजिटल अभिव्यक्ति पर कड़ी निगरानी रख रही हैं।
पर्यवेक्षण के इस दौर में न्यायिक और प्रशासनिक संस्थाएँ दोनों ही सामाजिक मीडिया की शक्ति को समझते हुए उचित कदम उठा रही हैं। परदिप में बम हमले के मुख्य आरोपी के घर पर ‘लटका’ नोटिस लगाने की कार्रवाई भी इसी संदर्भ में देखी जा सकती है, जहाँ कानून का पालन न करने पर कठोर उपाय अपनाए जा रहे हैं। इस प्रकार, न्यायिक सम्मान, सार्वजनिक सुरक्षा और डिजिटल नियमन के बीच संतुलन स्थापित करने के प्रयास स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं।