दुलेप ट्रॉफी | गुर्नूर का पुराना तरीका: जितना अधिक बॉलिंग करेंगे, उतना ही मजबूत बनेंगे
गुर्नूर बॉलर ने अपने तेज़ गति वाले बॉलिंग शैली से सभी का ध्यान आकर्षित किया है। पंजाब और उत्तर ज़ोन के प्रतिनिधि के रूप में वह न केवल तेज़ पिचों पर बल्कि असहाय पिचों पर भी लम्बे ओवरों तक गेंदबाज़ी करने में सक्षम हैं। इस प्रकार की दृढ़ता ने उन्हें भारतीय एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय और टेस्ट सेट‑अप में शीघ्र प्रवेश दिलाया है।
पिछले सप्ताह सत्यान्शु दीप को 2026 गोथिया ट्रॉफी के लिए भारतीय फुटबॉल टीम में चयनित किया गया था, जिससे युवा खिलाड़ियों की प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर लाने का महत्व स्पष्ट हुआ। इसी तरह, गुर्नूर के साथ ब्रार और सुथर को भारत ए टीम में शामिल किया गया, जो युवा क्रिकेटरों के विकास में निरंतर निवेश को दर्शाता है। इन सभी घटनाओं ने भारतीय खेल जगत में नई ऊर्जा का संचार किया है।
कटक के एक अस्पताल में बुज़ुर्ग रोगी के गुम होने की घटना ने सामाजिक जागरूकता को बढ़ाया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि खेल के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है। गुर्नूर की कठोर परिश्रम और निरंतर अभ्यास इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ रहकर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रकार उनका ‘पुराना तरीका’ न केवल व्यक्तिगत सफलता बल्कि राष्ट्रीय खेल संस्कृति को भी सुदृढ़ करता है।