उच्चतम न्यायालय ने यमुना बाढ़भूमि में आर्ट ऑफ़ लिविंग के नुकसान के मामले में राहत प्रदान की
उच्चतम न्यायालय की एक पैनल ने यह स्पष्ट किया कि यमुना बाढ़भूमि में स्थित आर्ट ऑफ़ लिविंग फाउंडेशन के कार्यक्रम स्थल की स्थिति पहले से ही गिरावट की ओर थी। न्यायाधीश सतिश चंद्र शर्मा और एन के सिंह ने कहा कि अभिलेखों में पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं जो यह दर्शाते हैं कि स्थल को सौंपने से पहले ही वह क्षीण अवस्था में था। इस कारण से हुए नुकसान के लिए फाउंडेशन को न्यायिक राहत प्रदान की गई।
यह निर्णय कई हालिया घटनाओं की पृष्ठभूमि में आया है। केवल दो दिन पहले ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर एक कार टकराव के बाद उलट गई थी, जिससे एक व्यक्ति घायल हुआ। उसी सप्ताह दिल्ली में यमुना पुल से कूदने वाले व्यक्ति की खोज‑बचाव कार्यवाही भी चल रही थी। इन घटनाओं ने यमुना के किनारे की सुरक्षा और पर्यावरणीय जोखिमों को उजागर किया, जिससे न्यायालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया।
इसके अतिरिक्त, राजस्थान और हरियाणा के बीच ३२ वर्षों के बाद यमुना जल परियोजना के लिए ३४,१०२ करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली थी। यह परियोजना जल संरक्षण के साथ-साथ बाढ़ नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, परन्तु पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखना अनिवार्य है। उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर बल दिया कि विकास के नाम पर बाढ़भूमि के प्राकृतिक स्वरूप को क्षति नहीं पहुँचाई जानी चाहिए, और सभी पक्षों को पर्यावरणीय नियमों का पालन करना अनिवार्य है।