विक्टोरिया में आत्महत्या से खोए १२१ आदिवासी: ‘बस अब बहुत हुआ’ | Kashyap Sandesh
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विक्टोरिया में आत्महत्या से खोए १२१ आदिवासी: ‘बस अब बहुत हुआ’

R c Nishad(साहनी) · 25 अगस्त 2026

विक्टोरिया के संसद भवन के सामने रखी गई १२१ खाली कुर्सियाँ इस राज्य में पिछले पाँच वर्षों में आत्महत्या से खोए आदिवासी जीवन की गहरी पीड़ा को दर्शाती हैं। रॉयल कमिशन ने २०२१ में मानसिक स्वास्थ्य सुधार हेतु आदिवासी उपचार केंद्रों की स्थापना की सिफारिश की थी, परन्तु राज्य सरकार ने अभी तक इन केंद्रों के लिए आवश्यक निधि नहीं प्रदान की। इस कारण से आदिवासी समुदाय में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और सामाजिक समर्थन की कमी स्पष्ट रूप से उजागर हुई है।

इसी समय, देश के अन्य हिस्सों में भी आदिवासी और स्थानीय समुदायों की समस्याएँ उभर रही हैं। दिल्ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान ने डिफेंस रिसर्च एंड डिवेलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन और एक स्टार्ट‑अप के सहयोग से कम लागत वाला टैक्टिकल एरोस्टैट विकसित किया, जो दूरस्थ क्षेत्रों में संचार और निगरानी में मदद कर सकता है। इसी प्रकार, नागालैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता ने संयुक्त राष्ट्र के विश्व आदिवासी युवा सम्मेलन में देश का प्रतिनिधित्व किया, जिससे आदिवासी अधिकारों और स्वास्थ्य मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा को बढ़ावा मिला।

इन उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि तकनीकी नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से आदिवासी समुदायों की समस्याओं का समाधान संभव है, परन्तु स्थानीय स्तर पर सरकार की सक्रियता आवश्यक है। राज्य को रॉयल कमिशन की सिफारिशों को तुरंत लागू करना चाहिए, ताकि उपचार केंद्र स्थापित हो सकें और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित हो। तभी हम इस दर्दनाक आँकड़े को घटा कर भविष्य में आदिवासी युवाओं के जीवन को सुरक्षित बना सकते हैं।

स्रोत: The Guardian World

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