चाचा निकेतु इरालु को स्मरण
चाचा निकेतु इरालु नागा जनजाति के एक बुजुर्ग और दृढ़ शांति कार्यकर्ता थे, जिन्होंने अपने जीवन को अपने लोगों की आज़ादी और सामाजिक न्याय के लिये समर्पित किया। उन्होंने वह समय देखा जब शांति की बात करना स्वयं एक राजनीतिक कृत्य माना जाता था, फिर भी वे संवाद के माध्यम से संदेह को समझ में बदलते रहे। उनका कार्य केवल शब्दों में नहीं, बल्कि दशकों की अनदेखी मेहनत में निहित था, जो आज भी नागा समुदाय के लिये प्रेरणा का स्रोत है।
दिल्ली में एक छोटे किराए के घर में उनका ठहराव, जहाँ वे मेरे साथ रहे, उनके विनम्र स्वभाव और गहरी मानवीय संवेदनशीलता को दर्शाता है। उस समय वे डॉक्टर वाटी के साथ थे, और उनके साथ बिताए क्षणों ने मुझे यह सिखाया कि इतिहास की महानता में भी आत्मगौरव नहीं होना चाहिए। उनके प्रोत्साहन ने कई युवा नागा कार्यकर्ताओं को मानवाधिकार और शांति के मार्ग पर आगे बढ़ाया, और आज उनका प्रभाव और अधिक स्पष्ट है।
पिछले कुछ हफ्तों में हमारे क्षेत्र में कई घटनाएँ घटीं, जैसे कि बड़ालंग में हुए हिंसक अपराध और संगीतकार अनिरुद्ध राविचंदर तथा एसआरएच के सीईओ कव्या मारन के बीच संभावित विवाह की अफवाहें, जो सामाजिक तनाव को उजागर करती हैं। इन सबके बीच चाचा निकेतु की शांति की सीख और संवाद की आवश्यकता अधिक स्पष्ट हो गई है। उनका निधन नागा जनजाति, अंगामी समुदाय और शांति के सभी समर्थकों के लिये एक बड़ी क्षति है, परन्तु उनका जीवन और आदर्श हमें भविष्य में भी मार्गदर्शन करेंगे।