‘हर घर जल’ योजना की सच्चाई: मध्य प्रदेश के २३ जिलों में नलजल कवरेज ७०% से कम | Kashyap Sandesh
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‘हर घर जल’ योजना की सच्चाई: मध्य प्रदेश के २३ जिलों में नलजल कवरेज ७०% से कम

R c Nishad(साहनी) · 21 अगस्त 2026

पिछले कुछ हफ्तों में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने मध्य प्रदेश के कई जिलों में अत्यधिक वर्षा की चेतावनी जारी की थी, जबकि उसी समय राज्य में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड को तेज़ी से लागू करने की प्रक्रिया चल रही थी। इन घटनाओं के बीच चिंदवाड़ा जिले में दो अलग‑अलग स्थानों पर बिजली के प्रकोप से चार लोगों की मृत्यु और आठ लोगों को चोटें आईं, जिससे जल, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं की आपसी निर्भरता स्पष्ट हुई। इन पृष्ठभूमियों को देखते हुए ‘हर घर जल’ योजना की वास्तविक स्थिति का आकलन करना अत्यावश्यक हो गया।

केंद्रीय सरकार ने राज्यसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से बताया कि मध्य प्रदेश के ५५ जिलों में से २३ जिलों में नलजल कवरेज ७० प्रतिशत से कम है। इसका अर्थ है कि इन जिलों के अधिकांश घरों को साफ़ पानी के लिए कुओं, टैंकों या अन्य अस्थायी साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। जल की इस कमी से रोगों का प्रसार, कृषि उत्पादन में गिरावट और महिलाओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ता है, क्योंकि उन्हें पानी लाने में अधिक समय व्यतीत करना पड़ता है।

सरकार ने जल परियोजनाओं को तेज़ी से पूरा करने, जल संरक्षण के उपाय अपनाने और ग्रामीण जल नेटवर्क को विस्तारित करने का वचन दिया है, परंतु बजट आवंटन, तकनीकी क्षमताओं और स्थानीय प्रशासनिक सहयोग में चुनौतियां बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जल गुणवत्ता की निगरानी, पाइपलाइन की लीकेज रोकथाम और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना इस समस्या के समाधान में प्रमुख भूमिका निभा सकता है। यदि इन उपायों को प्रभावी रूप से लागू किया गया तो ‘हर घर जल’ की वास्तविकता बदल सकती है और मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।

स्रोत: NDTV India

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