पेट्रोल का विकल्प बनेगा एथेनॉल? नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान, भारत में 100% एथेनॉल से चलेंगे वाहन
नई दिल्ली। क्या आने वाले वर्षों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें इतिहास बन जाएंगी? क्या भारत अपनी तेल आयात निर्भरता को काफी हद तक कम कर पाएगा? केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के ताजा बयान ने देश में ऊर्जा और ऑटोमोबाइल क्षेत्र को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
गडकरी ने घोषणा की है कि 100% एथेनॉल को वाहन ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देने वाले नियमों को अंतिम मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने कहा कि अब भारत में बड़े पैमाने पर ऐसे वाहन लॉन्च होने का रास्ता साफ हो गया है जो पूरी तरह एथेनॉल पर चल सकेंगे।
"मेरा सपना अब सच हो रहा है"
नितिन गडकरी ने कहा कि वर्षों पहले जब उन्होंने एथेनॉल को पेट्रोल का विकल्प बनाने की बात की थी, तब कई लोगों ने उनका मजाक उड़ाया था। लेकिन अब 100% एथेनॉल ईंधन को कानूनी मंजूरी मिलने के बाद उनका यह सपना साकार होता दिखाई दे रहा है।
गडकरी के अनुसार, उन्होंने हाल ही में 100% एथेनॉल से चलने वाले वाहनों के लिए नियमों को मंजूरी देने वाली फाइल पर हस्ताक्षर किए हैं और कई ऑटोमोबाइल कंपनियां जल्द ही ऐसे वाहन बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं।
कौन-कौन सी कंपनियां ला रही हैं एथेनॉल वाहन?
रिपोर्टों के अनुसार, मारुति सुजुकी पहले ही 100% एथेनॉल (E100) से चलने वाले वाहन पेश करने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। इसके अलावा टोयोटा, सुजुकी, हुंडई और अन्य कंपनियां भी फ्लेक्स-फ्यूल और एथेनॉल आधारित तकनीक पर काम कर रही हैं।
हाल के महीनों में हीरो मोटोकॉर्प ने भी अपना पहला फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिल मॉडल पेश किया है, जो एथेनॉल आधारित मोबिलिटी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आखिर एथेनॉल है क्या?
एथेनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है।
आज भारत में E20 पेट्रोल उपलब्ध है, जिसमें 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है। अब सरकार E85 और E100 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रणों को भी बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
भारत को क्या होगा फायदा?
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है। हर साल देश को पेट्रोलियम आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एथेनॉल आधारित वाहन बड़े पैमाने पर अपनाए जाते हैं तो:
कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी।
किसानों की आय बढ़ सकती है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
प्रदूषण में कमी आ सकती है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
क्या हैं चुनौतियां?
हालांकि तस्वीर पूरी तरह आसान नहीं है।
विशेषज्ञों का कहना है कि 100% एथेनॉल वाहन अपनाने के लिए देशभर में पर्याप्त ईंधन वितरण नेटवर्क विकसित करना होगा। इसके अलावा वाहन निर्माताओं को विशेष इंजन तकनीक का उपयोग करना होगा क्योंकि एथेनॉल सामान्य पेट्रोल से अलग गुण रखता है।
कुछ उद्योग विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि उच्च एथेनॉल मिश्रण कुछ वाहनों में माइलेज और प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है, इसलिए तकनीकी अनुकूलन आवश्यक होगा।
हाइड्रोजन पर भी सरकार का फोकस
गडकरी ने नागपुर में ग्रीन हाइड्रोजन आधारित परिवहन परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में हाइड्रोजन और एथेनॉल दोनों भारत को स्वच्छ और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था की ओर ले जा सकते हैं।
क्या सचमुच खत्म हो जाएगा पेट्रोल युग?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि भारत अब पेट्रोल और डीजल के विकल्पों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
जिस तरह कभी इलेक्ट्रिक वाहनों को भविष्य की तकनीक माना जाता था, उसी तरह अब एथेनॉल और फ्लेक्स-फ्यूल वाहन भी भारत की ऊर्जा क्रांति का नया अध्याय बन सकते हैं।
आने वाले पांच से दस वर्षों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि क्या एथेनॉल वास्तव में पेट्रोल का सस्ता, स्वदेशी और टिकाऊ विकल्प बन पाता है या नहीं। फिलहाल नितिन गडकरी का यह ऐलान भारत की ऊर्जा नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत जरूर दे रहा है।