उत्तarakhand के बटोलि गाँव को 300‑फुट घाटी ने अलग‑थलग कर दिया, रक्षा बंधन पर कठिनाई | Kashyap Sandesh
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उत्तarakhand के बटोलि गाँव को 300‑फुट घाटी ने अलग‑थलग कर दिया, रक्षा बंधन पर कठिनाई

R c Nishad(साहनी) · 28 अगस्त 2026

उत्तarakhand के बटोलि गाँव में हाल ही में एक बड़े भू‑स्खलन ने पहाड़ी रास्ते को ध्वस्त कर दिया, जिससे एक 300‑फुट गहरी घाटी बन गई। इस घाटी ने गाँव को मुख्य राजमार्ग से पूरी तरह अलग‑थलग कर दिया, जिससे निवासियों को रोज़मर्रा की आवश्यकताओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इस वर्ष का रक्षा बंधन, जो आमतौर पर भाई‑बहन के प्रेम का उत्सव होता है, अब गाँव की महिलाओं के लिए एक कठिन चुनौती बन गया है।

गाँव के बुजुर्गों का कहना है कि पहले कभी इस तरह की बाधा नहीं थी; अब उन्हें पहाड़ी रास्तों पर खतरनाक पुलों और अस्थायी रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई परिवारों ने बताया कि उन्हें अपने भाई‑बहनों को बंधन बाँधने के लिए देहरादून या निकटवर्ती शहरों तक लंबी यात्रा करनी पड़ रही है, जबकि कुछ ने तो इस अवसर को ही त्याग दिया है। इस बीच, स्थानीय प्रशासन ने आपातकालीन सहायता के लिए हेलीकॉप्टर और डोंगरिया गाड़ी भेजने का वादा किया है, परंतु कठिन भू‑भौगोलिक स्थिति के कारण सहायता पहुँचना धीमा है।

पिछले कुछ महीनों में भारत के विभिन्न हिस्सों में घाटियों में गिरते वाहनों की घटनाएँ बढ़ी हैं; जम्मू‑कश्मीर के डोडा में दो व्यक्तियों की मृत्यु और कई घायल हुए, तथा एक मालवाहक वाहन चन्ना क्षेत्र में घाटी में गिरा। इसी तरह, पुणे पुलिस ने लोहे के फाइबर डमी को 300‑फुट घाटी में फेंक कर एक हत्या स्थल की पुनःरचना की थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि गहरी घाटियाँ न केवल जीवन‑यापन में बाधा बनती हैं, बल्कि आपातकालीन कार्यों में भी जटिलता उत्पन्न करती हैं। इन घटनाओं ने बटोलि गाँव की स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है, जहाँ अब सुरक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक बंधनों की रक्षा के लिए त्वरित उपायों की आवश्यकता है।

स्रोत: NDTV India

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