विश्व में ताप बढ़ता है, फिर भी भारत क्यों ठंडा रहता है?
पिछले कुछ हफ्तों में यूरोप में तापमान वैश्विक औसत से दो गुना अधिक बढ़ा, जिससे फ्रांस में हजारों अतिरिक्त मौतें दर्ज हुईं। इसी दौरान कश्मीर में भी तापमान में अचानक उछाल आया, जिससे एसी और कूलर की मांग में वृद्धि हुई। लेकिन इन सबके बीच भारत के अधिकांश क्षेत्रों में तापमान अपेक्षाकृत स्थिर रहा, जिससे लोगों को राहत मिली। इस असामान्य स्थिति के पीछे भारत की विशाल भौगोलिक विविधता और समुद्री हवाओं का महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है।
भारत के उत्तर में हिमालयी बर्फ़ीले पहाड़ों से ठंडी हवा दक्षिण की ओर बहती है, जिससे उपजाऊ मैदानों में तापमान नियंत्रित रहता है। साथ ही, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली समुद्री हवाएँ भी गर्मी को शीतल बनाती हैं। इन प्राकृतिक प्रक्रियाओं के कारण भारत में मौसमी परिवर्तन अपेक्षाकृत सुगम होते हैं, जबकि यूरोप में गर्मी की लहरें तेज़ी से फैल रही हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि एल नीनो जैसी जलवायु घटनाएँ समुद्री तापमान को बढ़ा रही हैं, जिससे समुद्री जीवों में भूख की कमी और मरने की स्थिति उत्पन्न हुई है। इस संदर्भ में भारत के तटीय क्षेत्रों में मछलियों की गहराई में प्रवास करने की प्रवृत्ति देखी गई, जिससे समुद्री खाद्य श्रृंखला पर असर पड़ा। हालांकि, भारत की विस्तृत तटीय रेखा और विविध जलवायु क्षेत्रों ने इस प्रभाव को सीमित किया, जिससे देश में कुल मिलाकर ठंडक बनी रही।