भारतीय शेयर बाजार दो वर्षों में नकारात्मक रिटर्न, २०१२ के बाद सबसे खराब प्रदर्शन, विश्लेषण बताता है | Kashyap Sandesh
शेयर बाजार

भारतीय शेयर बाजार दो वर्षों में नकारात्मक रिटर्न, २०१२ के बाद सबसे खराब प्रदर्शन, विश्लेषण बताता है

R c Nishad(साहनी) · 25 अगस्त 2026

जैसे ही १५ जून २०२६ को संयुक्त राज्य और ईरान ने युद्ध समाप्ति का समझौता किया, तेल की कीमतें गिरने लगीं और एशियाई शेयर बाजारों में तेज़ी देखी गई। हालांकि, भारतीय बाजार ने इस सकारात्मक वैश्विक माहौल का पूर्ण लाभ नहीं उठाया, और सेंसेक्स व निफ्टी दोनों ने निरंतर गिरावट का रुझान दिखाया। इस अवधि में निवेशकों ने विदेशी बाजारों की उछाल के बावजूद घरेलू आर्थिक संकेतकों में कमजोरी महसूस की, जिससे बाजार में बेचैनी बढ़ी।

इसके बाद १ जुलाई और २ जुलाई २०२६ को दो‑दिन की गिरावट के बाद बाजार में थोड़ी पुनरुत्थान की आशा जगी, परन्तु यह पुनरुत्थान अस्थायी रहा। आईटी, तेल‑गैस और कुछ प्रमुख बैंकों के शेयरों में भारी बिक्री ने सूचकांकों को फिर से नीचे धकेल दिया। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट किया कि वैश्विक सकारात्मक प्रवृत्तियों के बावजूद भारतीय बाजार में संरचनात्मक समस्याएँ मौजूद हैं, जैसे कि उच्च महंगाई और नीति अनिश्चितता।

वर्तमान में, सेंसेक्स ने ६९७ लगातार दिनों तक नया सर्वकालिक उच्च नहीं छुआ, जो कि २०१२ के बाद का सबसे लंबा गिरावट काल है। निवेशकों को अब दीर्घकालिक रणनीति अपनाने की आवश्यकता है, जिसमें विविधीकरण और जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। साथ ही, नीति निर्माताओं को आर्थिक सुधारों को तेज़ करने और बाजार में विश्वास पुनः स्थापित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दीर्घकालिक मंदी से बचा जा सके।

स्रोत: Economic Times Markets

© 2026 Kashyap Sandesh. सर्वाधिकार सुरक्षित।

होम · हमारे बारे में · संपर्क · गोपनीयता नीति

Operated by Billionbyte Technologies