बॉन्ड यील्ड में गिरावट के कारण सोना शुरुआती जून के उच्च स्तर के निकट बना रहता है
अमेरिका के कोष ने हाल ही में तरलता बढ़ाने के कदम उठाए, जिससे सरकारी बॉन्ड की यील्ड में उल्लेखनीय गिरावट आई। यील्ड में इस गिरावट ने डॉलर को कमजोर किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें फिर से उछाल पर आ गईं। निवेशकों ने सोने को एक सुरक्षित आश्रय के रूप में देखा, विशेषकर जब मुद्रास्फीति की आशंकाएँ और ब्याज दरों में संभावित वृद्धि का माहौल बना हुआ था।
भारत में भी सोने के बाजार में हलचल देखी गई। पिछले सप्ताह, कई भारतीय निवेशकों ने पुराने सोने को बेचने की भीड़ बना ली, क्योंकि कीमतें रिकॉर्ड स्तर के निकट थीं। इस प्रवृत्ति को देखते हुए, विशेषज्ञों ने कहा कि सोने की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी, क्योंकि निवेशकों की रुचि अभी भी उच्च बनी हुई है।
साथ ही, संसद सदस्यों और सरकारी अधिकारियों के घरों से लगभग दो हज़ार सात सौ करोड़ रुपये मूल्य का सोना और नकदी जब्त की गई, जिससे बाजार में सोने की आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। इस प्रकार, अंतरराष्ट्रीय तरलता उपाय, घरेलू बिक्री की प्रवृत्ति और बड़े पैमाने पर जब्ती सभी मिलकर सोने को वित्तीय अस्थिरता के समय में एक भरोसेमंद निवेश विकल्प बना रहे हैं।