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पूरी प्रवाह वाली एफसीएनआर जमा राशि सौ अरब डॉलर तक पहुँच सकती है, अनुमान से अधिक

R c Nishad(साहनी) · 25 अगस्त 2026

एफसीएनआर (विदेशी मुद्रा बचत) योजना ने पिछले कुछ महीनों में उल्लेखनीय गति पकड़ी है, जबकि पहले के लेखों में बताया गया था कि अमेरिका और सिंगापुर में रहने वाले भारतीय नागरिकों को टैक्स के डर से इस योजना से दूर रहने की प्रवृत्ति थी। हालांकि, हालिया डेटा दर्शाता है कि इन निवेशकों ने अब टैक्स जोखिम को कम करके उच्च रिटर्न की तलाश में इस योजना को अपनाया है, जिससे जमा प्रवाह में तेज़ी आई है। यह प्रवाह भारतीय वित्तीय प्रणाली के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

विशेषज्ञों ने बताया कि जेफ़्रीज़ ने अपनी पूर्वानुमानित सीमा को 70‑80 अरब डॉलर से बढ़ाकर अब 90‑100 अरब डॉलर कर दिया है, और यह अनुमान अगस्त के अंत तक लागू होगा। इस वृद्धि का मुख्य कारण विदेशी मुद्रा में स्थिर रिटर्न, कम जोखिम और भारतीय रिज़र्व बैंक की नीतियों में लचीलापन है। साथ ही, एपी के मुख्यमंत्री द्वारा राज्य में खनिज मानचित्रण की पहल ने निवेशकों के विश्वास को और बढ़ाया है, जिससे पूंजी प्रवाह में अतिरिक्त समर्थन मिला है।

इस प्रवाह के आर्थिक प्रभाव कई पहलुओं में देखे जा सकते हैं। पहले, यह विदेशी मुद्रा भंडार को सुदृढ़ करेगा और भारत की भुगतान संतुलन को बेहतर बनाएगा। दूसरा, घरेलू बैंकों को अतिरिक्त तरलता मिलेगी, जिससे ऋण देने की क्षमता बढ़ेगी। अंत में, नीति निर्माताओं को टैक्स नियमों को स्पष्ट करने और निवेशकों के लिए सुविधाजनक माहौल बनाने की आवश्यकता है, ताकि इस सकारात्मक प्रवाह को दीर्घकालिक रूप से स्थिर किया जा सके।

स्रोत: Economic Times Markets

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