रुपया तीन‑सप्ताह के न्यूनतम स्तर 95.71 पर, वित्तीय चिंताएँ बढ़ीं
बुधवार को भारतीय रुपया ने 95.71 के स्तर पर बंदी दर्ज की, जो पिछले तीन हफ्तों में सबसे निचला स्तर है। इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी है, जिसने आयात लागत को बढ़ा दिया और मुद्रा पर दबाव बढ़ा दिया। भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस स्थिति को देखते हुए नौ लगातार ट्रेडिंग सत्रों में बाजार में प्रवेश कर बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खरीदी, जिससे आगे की गिरावट को रोका गया।
पिछले कुछ हफ्तों में रुपया पहले 94.69 और फिर 94.54 के स्तर पर गिरा था, जब विदेशी निवेशकों के निकास और भू‑राजनीतिक तनाव ने बाजार को प्रभावित किया था। उन घटनाओं के बाद भी भारतीय रिज़र्व बैंक ने समय‑समय पर हस्तक्षेप करके मुद्रा को स्थिर रखने की कोशिश की, परन्तु तेल की कीमतों में तेज़ी ने नई चुनौती पेश की। इस बार की गिरावट ने निवेशकों को चेतावनी दी है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ता है।
रुपए के गिरने के साथ ही भारतीय शेयर बाजार में भी गिरावट देखी गई, जहाँ ऊर्जा‑संबंधी कंपनियों के शेयरों में भारी बिक्री हुई। उच्च तेल कीमतों के कारण उत्पादन लागत बढ़ने से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना, जिससे निवेशकों का भरोसा कम हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें उच्च स्तर पर बनी रहती हैं और विदेशी निवेश में निरंतर निकास जारी रहता है, तो भारतीय मुद्रा को आगे भी समर्थन की आवश्यकता होगी, और भारतीय रिज़र्व बैंक को अपनी नीति में लचीलापन दिखाना पड़ेगा।