तेल की कीमत आज (21 अगस्त): ईरान शांति समझौते की आशा घटने से कच्चा तेल $95 के करीब, विशेषज्ञों की राय
ईरान और पश्चिमी देशों के बीच शांति समझौते का नवीनीकरण न हो पाने से कच्चे तेल की कीमतें फिर से बढ़ रही हैं, और आज के सत्र में तेल की कीमत $95 के निकट पहुंच गई है। इस विकास ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे भारत के शेयर बाजार में भी अस्थिरता देखी जा रही है। पिछले हफ्ते भारत‑अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति ने बाजार में आशा की लहर लाई थी, पर अब पश्चिमी एशिया में तनाव और तेल की कीमतों में उछाल ने उस आशा को धूमिल कर दिया है।
वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि तेल की कीमतों में इस उछाल का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार के विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ेगा, विशेषकर ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल कंपनियों के शेयरों पर। साथ ही, पेट्रोल‑डिज़ल की कीमतों में कटौती केवल तब ही संभव होगी जब कच्चे तेल की कीमतें स्थिर होकर कम स्तर पर रहें, जैसा कि पिछले कुछ हफ्तों में देखा गया था। इस कारण, उपभोक्ताओं को अभी भी उच्च ईंधन कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि ईरान‑पश्चिमी देशों के बीच शांति वार्ता फिर से शुरू नहीं होती, तो तेल की कीमतें और भी ऊपर जा सकती हैं, जिससे वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर दबाव बढ़ेगा। निवेशकों को इस परिदृश्य में जोखिम प्रबंधन के उपाय अपनाने चाहिए और विविधीकरण पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, नीति निर्माताओं को ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों में निवेश को तेज करना चाहिए।