अमेरिका के कॉलेजों में भारतीय छात्रों के आवेदन १५ प्रतिशत घटे
सामान्य आवेदन प्रणाली (कॉमन एप) की नवीनतम रिपोर्ट ने बताया कि २०२५‑२६ शैक्षणिक वर्ष में भारत से संयुक्त राज्य अमेरिका के कॉलेजों में दाखिले के लिए किए गए आवेदन में पंद्रह प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट आई है। इस गिरावट के पीछे कड़ी वीज़ा नियम, सीमित रहने की अवधि और वैकल्पिक व्यावसायिक प्रशिक्षण (OPT) पर संभावित उच्च शुल्क जैसे कारक प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। इस स्थिति ने भारतीय छात्रों और उनके अभिभावकों में विदेश में पढ़ाई को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है।
इन चुनौतियों के मद्देनज़र, एआईसीटीई ने राजपुरा के आर्यन समूह कॉलेजों में 'सार्वभौमिक मानव मूल्य' पर एक वेबिनार आयोजित किया, जिसका उद्देश्य नए छात्रों को नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीय भावना से परिचित कराना था। इसी तरह उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'स्कूल चलो अभियान' के दूसरे चरण का शुभारंभ किया, जिससे स्कूल छोड़ने की दर में गिरावट आई और छात्रों को घरेलू शिक्षा प्रणाली में बनाए रखने की दिशा में सकारात्मक संकेत मिला। इन पहलों ने छात्रों को विदेश में पढ़ाई के विकल्पों के बजाय भारत में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया है।
रांची की छात्रा अवनी केजरीवाल की सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन में पूर्ण अंक प्राप्त करने की कहानी ने भी देश में शैक्षणिक सुधारों की आशा को बढ़ाया है। इस प्रकार, जबकि अमेरिकी कॉलेजों में भारतीय आवेदनों में गिरावट देखी जा रही है, घरेलू स्तर पर शैक्षणिक संस्थानों और सरकार द्वारा उठाए गए कदम छात्रों को बेहतर भविष्य की ओर मार्गदर्शन करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।