एसएससीएल ने मेडिकल बोर्ड की बैठकें फिर शुरू की, कर्मचारियों ने राहत न मिलने की शिकायत
एसएससीएल ने पिछले डेढ़ वर्ष में मेडिकल बोर्ड की बैठकों को स्थगित करने के बाद अब उन्हें फिर से शुरू किया है। यह कदम कर्मचारियों के स्वास्थ्य संबंधी मामलों को सुलझाने के लिए आवश्यक माना गया, क्योंकि कई श्रमिकों को उचित चिकित्सा मूल्यांकन नहीं मिल पा रहा था। हालांकि, बोर्ड की पुनः शुरुआत के बाद भी कई रोगियों को फिट घोषित किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ा है।
ट्रेड यूनियन के प्रमुखों ने कहा कि गंभीर रोगों से ग्रस्त श्रमिकों को फिर भी काम पर लौटने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि स्वीकृत चिकित्सा आवेदन की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आई है। यह स्थिति पिछले महीनों में हारिश राव द्वारा ‘कांग्रेस हटाओ, सिंगरेनी बचाओ’ के नारे के तहत उठाए गए मुद्दों से जुड़ी है, जहाँ उन्होंने एसएससीएल के कर्मचारियों के कल्याण को प्राथमिकता देने की बात की थी। साथ ही, सिंगरेनी कोलियरीज़ यूनियन ने कोयागुडेम और जीवीआर कोयला ब्लॉकों के आवंटन की मांग की थी, जो कर्मचारियों के आर्थिक सुरक्षा से भी संबंधित है।
राष्ट्रीय मेडिकल आयोग ने पोस्ट‑ग्रेजुएट डिप्लोमा को २०२७‑२८ से समाप्त करने का निर्णय लिया है, जिससे भविष्य में डॉक्टरों की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। इस बदलाव के कारण एसएससीएल को अपने मेडिकल बोर्ड की कार्यवाही को सुदृढ़ करने और कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए नई रणनीतियों की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर उचित उपाय नहीं किए गए तो कर्मचारियों के स्वास्थ्य अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।