केंद्र के हस्तक्षेप के बाद मेटा ने बाल यौन शोषण सामग्री पर बढ़ाई संवेदनशीलता: सूत्र
केंद्रीय सरकार ने हाल ही में मेटा समूह को बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसारण को रोकने के लिए कड़ी चेतावनी दी, जिससे कंपनी ने अपनी नीतियों में संशोधन किया। आईटी मंत्रालय ने कहा कि ऐसी अवैध सामग्री को सुरक्षित‑शरण की सुरक्षा नहीं मिलेगी और प्लेटफ़ॉर्म को तुरंत हटाना अनिवार्य होगा। इस दिशा में मेटा ने अपने एल्गोरिदम को पुनः जांचा और एआई‑आधारित लेबलिंग प्रणाली को सुदृढ़ किया।
पिछले महीने तेलंगाना में एक व्यक्ति को इंस्टाग्राम पर बाल शोषण सामग्री साझा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, जिससे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की निगरानी की आवश्यकता पर प्रकाश पड़ा। इसी समय यमुना एक्सप्रेसवे पर एक कार दुर्घटना में कई लोग घायल हुए, जो सार्वजनिक सुरक्षा और डिजिटल सूचना के महत्व को दोहराता है। इन घटनाओं ने सरकार को डिजिटल सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।
मेटा ने बताया कि अब वह व्हाट्सएप उपयोगकर्ता नामों की जाँच, एल्गोरिदमिक पक्षपात को दूर करने और एआई‑आधारित सामग्री मॉडरेशन को सख्त करने के लिए विशेष टीमें स्थापित कर रहा है। भारत में ९२ प्रतिशत से अधिक छोटे और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मेटा के प्लेटफ़ॉर्म पर निर्भर हैं, इसलिए इस नीति का व्यापक आर्थिक प्रभाव भी होगा। कुल मिलाकर, यह कदम डिजिटल क्षेत्र में बाल सुरक्षा को सुदृढ़ करने और उपयोगकर्ताओं के भरोसे को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।