रम मंदिर दान चोरी मामले में पूर्व ट्रस्ट अधिकारियों चम्पत राय और अनिल मिश्रा को मिली सफ़ाई
अयोध्या में चल रहे रम मंदिर दान चोरी मामले ने पिछले कुछ हफ्तों में कई कानूनी और सामाजिक बहसें छेड़ दी थीं। ३० जून को वैष्णव हिन्दू परिषद (वीएचपी) ने फ़ैज़ाबाद बार एसोसिएशन के उन वकीलों को प्रतिबंधित करने के फैसले की आलोचना की थी, जो आरोपियों की रक्षा कर सकते थे। इसके बाद २९ जून को बार एसोसिएशन ने स्वयं ही आरोपियों की ओर से प्रतिनिधित्व न करने का निर्णय लिया और उल्लंघन करने वालों पर दंड का प्रावधान किया। इन घटनाओं ने मामले की जटिलता को बढ़ा दिया था।
विशेष जांच टीम ने अपने विस्तृत सर्वेक्षण के बाद चम्पत राय और अनिल मिश्रा दोनों को साफ़ किया है। दोनों ने दान चोरी के आरोपों के चलते अपने-अपने पदों से इस्तीफा दिया था, पर जांच में यह पाया गया कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दान की गड़बड़ी के लिए मुख्य जिम्मेदारी अन्य व्यक्तियों पर है, जिनकी पहचान अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। इस निर्णय से उन लोगों को राहत मिली है जो इन दो पूर्व अधिकारियों को लेकर अनिश्चितता में थे।
रिपोर्ट के बाद विभिन्न संगठनों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएँ व्यक्त की हैं। वीएचपी ने इस सफ़ाई को न्याय की जीत कहा और यूपी विशेष जांच टीम को १५ दिनों की अतिरिक्त जांच अवधि देने की सराहना की। वहीं कुछ राजनीतिक दलों ने कहा कि यह कदम राजनीतिक खेल का हिस्सा हो सकता है, क्योंकि दान चोरी के मामले में कई बार राजनीतिक दबाव देखा गया है। भविष्य में जांच टीम को आगे की गहराई से जांच जारी रखने की उम्मीद है, ताकि दान के वास्तविक गबनकर्ता को सजा मिल सके।