तेलंगाना में मानसून वर्षा में 12 प्रतिशत कमी, अगस्त में गिरावट जारी
तेलंगाना में इस वर्ष के मानसून ने अब तक ४३०.१ मिलीमीटर वर्षा प्रदान की है, जबकि सामान्य स्तर ४८८.८ मिलीमीटर है, जिससे १२ प्रतिशत की कमी सामने आई है। जुलाई में कुछ हद तक वर्षा में सुधार देखा गया, परन्तु अगस्त में वर्षा की गति धीमी रही और वर्तमान में पंद्रह जिलों को कमी वाले वर्ग में वर्गीकृत किया गया है। यह कमी न केवल कृषि उत्पादन को प्रभावित करेगी, बल्कि जल संसाधन प्रबंधन में भी चुनौतियाँ उत्पन्न करेगी।
पिछले कुछ हफ्तों में मेघालय ने ७४ प्रतिशत की सबसे अधिक मानसून वर्षा कमी दर्ज की, जबकि गोवा में जून में ३४ प्रतिशत की कमी देखी गई, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों में कमजोर मानसून की प्रवृत्ति स्पष्ट हो रही है। भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, उत्तरपूर्वी और पश्चिमी तट के कई क्षेत्रों में वर्षा की कमी ने जलभंडारण और कृषि योजनाओं को प्रभावित किया है। तेलंगाना की स्थिति इन व्यापक प्रवृत्तियों का एक हिस्सा है, जहाँ वर्षा की कमी से जलस्रोतों पर दबाव बढ़ रहा है।
वित्तीय वर्ष २०२६‑२७ की पहली दो महीनों में भारत का बजट घाटा १.६२ लाख करोड़ रुपये तक बढ़ा, जो कुल बजट अनुमान का ९.६ प्रतिशत है। इस बढ़ते घाटे का असर कृषि सब्सिडी और जलसंधारण परियोजनाओं पर पड़ सकता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ सहना पड़ सकता है। इसलिए, सरकार को वर्षा की कमी को ध्यान में रखते हुए त्वरित उपाय करने की आवश्यकता है, जैसे कि जलसंधारण संरचनाओं का विस्तार और सूखा प्रतिरोधी फसलों का प्रोत्साहन।