राज्यपाल ने व्यासखी नृत्योत्सव २०२६ के पोस्टर का अनावरण करते हुए कहा कि यह दो दिवसीय महोत्सव ओडिशा की पारम्परिक नृत्य कला को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम होगा। इस अवसर पर लेखन अकादमी के अध्यक्ष वी वी रामना मूर्ति, महोत्सव के निदेशक तथा अकादमी के संस्थापक बाथिना विक्रम गौड़, और समन्वयक भाग्यश्री बाथिना ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि इस महोत्सव में विभिन्न शैलियों के नर्तक और कलाकार भाग लेंगे, जिससे सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा मिलेगा।

पिछले महीने ओडिशा में महिला‑उद्यमी मंच की शुरुआत हुई, जिससे महिला‑स्वामित्व वाले उद्यमों का प्रतिशत ५३ प्रतिशत तक पहुंच गया। इस आर्थिक प्रगति ने राज्य की सांस्कृतिक पहल को भी सुदृढ़ किया है, क्योंकि कई महिला कलाकार अब अपने कला समूहों को व्यवस्थित रूप से संचालित कर रहे हैं। इस प्रकार, आर्थिक सशक्तिकरण और सांस्कृतिक संरक्षण के बीच एक सकारात्मक संबंध स्थापित हो रहा है।

व्यासखी नृत्योत्सव के दौरान ओडिशा की पारम्परिक नृत्य शैलियों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों के प्रदर्शन भी देखे जाएंगे, जिससे दर्शकों को विविधता का अनुभव होगा। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाया है और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को प्रोत्साहित किया है। इस प्रकार, यह महोत्सव ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर करने का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।