सीएसएल ने भारतीय नौसेना को मंगरोल एएसडब्ल्यू‑एसडब्ल्यूसी जहाज़ सौंपा, जो ८० प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटकों से निर्मित है। यह पोत जलजेट द्वारा propelled है और तटीय जल में जलजली निगरानी तथा पनडुब्बी विरोधी युद्ध के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इस प्रकार की स्वदेशी तकनीक राष्ट्रीय रक्षा को आत्मनिर्भर बनाते हुए विदेशी आयात पर निर्भरता को घटाती है।

मंगरोल में अत्याधुनिक टॉरपीडो, पनडुब्बी विरोधी रॉकेट, साथ ही उन्नत रडार व सोनार प्रणाली स्थापित है। इन उपकरणों की मदद से यह जहाज़ समुद्री सतह के नीचे की गतिविधियों को सटीक रूप से ट्रैक कर सकता है और आवश्यकतानुसार त्वरित प्रतिक्रिया दे सकता है। जलजेट propulsion प्रणाली तेज़ गति और कम शोर प्रदान करती है, जिससे पोत को छिपकर संचालन करने में सुविधा मिलती है।

पिछले कुछ हफ्तों में भारतीय नौसेना ने अडेन की खाड़ी में समुद्री डकैती को रोकते हुए अपनी तत्परता सिद्ध की थी, और इसी क्रम में मंगरोल की डिलीवरी समुद्री सुरक्षा को और सुदृढ़ करेगी। साथ ही, जम्मू‑कश्मीर एवं लद्दाख में जनगणना के प्रथम चरण में स्व-गणना को अपनाने वाले लाखों घरों ने राष्ट्रीय योजना में भागीदारी को बढ़ावा दिया है, जो देश की समग्र तैयारी को दर्शाता है। इन सभी पहलुओं से स्पष्ट है कि स्वदेशी नौसैनिक तकनीक और व्यापक राष्ट्रीय योजना मिलकर भारत की समुद्री रक्षा को नई ऊँचाइयों पर ले जा रहे हैं।