सिद्धवतम मंदिर में ध्वजस्तम्भ अभिषेक समारोह का शुभारम्भ वेद पाठ से हुआ, जिसके बाद गणपति पूजा, ऋत्विजवरण और कंकणाधारण का क्रमबद्ध अनुष्ठान किया गया। पुजारियों ने पुण्यवचन करके देवत्व की कृपा प्राप्त की और विशेष रूप से निर्मित यज्ञशाला में प्रवेश किया, जहाँ कलश प्रतिष्ठा तथा विभिन्न मंडपाध्ययन किए गए। इस प्रकार के अनुष्ठान स्थानीय जनमानस में आध्यात्मिक उत्साह का संचार करते हैं।
यज्ञशाला में कलश प्रतिष्ठा के साथ ही विभिन्न मंत्रोच्चार और हवन किए गए, जिससे पवित्रता का वातावरण निर्मित हुआ। यह समारोह शारदा मंदिर में आयोजित वार्षिक अभिषेक से समान परम्परागत तत्वों को दर्शाता है, जहाँ भी पुजारियों ने समान रीति-रिवाजों के माध्यम से देवताओं की कृपा प्राप्त की थी। इस प्रकार के अनुष्ठान धार्मिक एकता और सांस्कृतिक निरंतरता को सुदृढ़ करते हैं।
स्थानीय जनसमुदाय ने बड़े उत्साह के साथ इस कार्यक्रम में भाग लिया, जैसा कि पुरी में स्नान पूर्णिमा के दौरान देखा गया था। दोनों समारोहों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शुद्धि और सामाजिक एकजुटता का अवसर प्रदान किया। भविष्य में भी ऐसे धार्मिक आयोजन क्षेत्रीय सांस्कृतिक धरोहर को सुदृढ़ करेंगे और लोगों में परम्परागत मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाएंगे।

