यह लेख डेबनजन बोर्थाकुर द्वारा लिखा गया है। टोरंटो के योंग-डंडास स्क्वायर में बारिश हो रही थी। लोग कभी-कभी पास के आश्रयों के नीचे खड़े हो जाते थे, लेकिन कई छात्र खुले में खड़े रहे, उनके कपड़े गीले होते जा रहे थे क्योंकि वे तख्तियां पकड़े हुए थे, भाषण दे रहे थे और नारे लगा रहे थे जिसमें भारत में छात्रों के लिए न्याय की मांग की जा रही थी। विदेश में रहने से भारतीय उदासीन नहीं हो जाते हैं।
हाल ही में, सेशेल्स में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया था। सेशेल्स में भारतीय डायस्पोरा ने मजबूत संबंधों की उम्मीद जताई थी। यह दिखाता है कि विदेश में बसे भारतीय अपने देश के प्रति अभी भी जागरूक और जिम्मेदार हैं।
इसी तरह, असम में भी भारतीय डायस्पोरा की गतिविधियां देखी जा सकती हैं। असम में रहने वाले लोग विदेश में बसे अपने परिवार के सदस्यों के साथ जुड़े रहते हैं और उनके साथ मिलकर समाज के विकास में योगदान करते हैं। यह दिखाता है कि भारतीय डायस्पोरा अपने देश के प्रति हमेशा जागरूक और जिम्मेदार रहता है।
इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि विदेश में बसे भारतीय अपने देश के प्रति अभी भी जागरूक और जिम्मेदार हैं। वे अपने देश के विकास में योगदान करते हैं और अपने समाज के लिए काम करते हैं। यह एक सकारात्मक संकेत है और यह दिखाता है कि भारतीय डायस्पोरा अपने देश के प्रति हमेशा जागरूक और जिम्मेदार रहता है।

