गुवाहाटी: उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कानून प्रवर्तन एजेंसियों से छात्र प्रदर्शनों के दौरान संयम बरतने का आग्रह किया, चेतावनी दी कि 'शक्तिशाली राज्य' की आक्रामक प्रतिक्रिया से तनाव बढ़ सकता है और और हिंसा हो सकती है। यह टिप्पणी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान आई, जिसमें कार्रवाई की मांग की गई थी।
न्यायालय की यह टिप्पणी तब आई जब मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई, जिसमें कार्रवाई की मांग की गई थी। यह याचिका हाल के दिनों में छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के संबंध में थी। न्यायालय ने कहा कि छात्र प्रदर्शनों पर आक्रामक प्रतिक्रिया देने से स्थिति और बिगड़ सकती है।
न्यायालय की इस टिप्पणी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि हाल के दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र प्रदर्शन हुए हैं और इनमें से कई प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं। न्यायालय ने कहा कि ऐसे में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को संयम से काम लेना चाहिए और आक्रामक प्रतिक्रिया से बचना चाहिए। यह न केवल छात्र प्रदर्शनों को शांतिपूर्ण बनाने में मदद करेगा, बल्कि समाज में व्याप्त तनाव को भी कम करने में सहायक होगा।
इस मामले में न्यायालय की टिप्पणी का स्वागत किया जा रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि इससे भविष्य में छात्र प्रदर्शनों के दौरान होने वाली हिंसा को रोकने में मदद मिलेगी। न्यायालय की इस टिप्पणी से यह भी स्पष्ट होता है कि वह छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और साथ ही समाज में शांति और सौहार्द को बनाए रखने के लिए भी प्रयासरत है।

