भारत की वैश्विक व्यापार शक्ति हुई मजबूत, 98% निर्यात को मिलेगा शुल्क-मुक्त बाजार
नई दिल्ली: भारत ने वैश्विक व्यापार के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल निर्यात रिकॉर्ड 863 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह भारत के निर्यात इतिहास का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।
सरकार का कहना है कि विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और नए व्यापार समझौतों की बदौलत भारत की वैश्विक बाजारों में पहुंच लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब दुनिया के कई देशों में आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव बने हुए हैं।
EFTA समझौते से खुले नए अवसर
भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच लागू हुए ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) को इस उपलब्धि के पीछे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
EFTA में चार देश शामिल हैं:
Switzerland
Norway
Iceland
Liechtenstein
इस समझौते के तहत भारत के लगभग 98 प्रतिशत निर्यात उत्पादों को शुल्क-मुक्त (Duty-Free) पहुंच मिलेगी। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और निर्यातकों को यूरोपीय बाजारों में बड़ा अवसर मिलेगा।
100 अरब डॉलर के निवेश का वादा
इस समझौते की सबसे बड़ी विशेषता केवल व्यापार नहीं, बल्कि निवेश भी है।
EFTA देशों ने भारत में अगले वर्षों में 100 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की प्रतिबद्धता जताई है। माना जा रहा है कि यह निवेश विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, हरित ऊर्जा, वित्तीय सेवाओं और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में आएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह निवेश तय समयसीमा में आता है तो लाखों नए रोजगार पैदा हो सकते हैं और भारत की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
किन क्षेत्रों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ?
व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार निम्नलिखित क्षेत्रों को सबसे अधिक फायदा मिलने की संभावना है:
फार्मास्यूटिकल्स
इंजीनियरिंग उत्पाद
टेक्सटाइल एवं परिधान
रत्न एवं आभूषण
ऑटो कंपोनेंट्स
आईटी एवं डिजिटल सेवाएं
कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण
शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने से भारतीय कंपनियां यूरोपीय बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर अपने उत्पाद बेच सकेंगी।
भारत की व्यापार रणनीति को मिली मजबूती
हाल के वर्षों में भारत ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी भूमिका मजबूत करने के लिए कई मुक्त व्यापार समझौतों पर जोर दिया है। सरकार का लक्ष्य भारत को एक प्रमुख निर्यात और विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
विश्लेषकों का मानना है कि EFTA समझौता भारत के लिए केवल व्यापारिक अवसर नहीं बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले निवेश, तकनीकी सहयोग और रोजगार सृजन का भी माध्यम बन सकता है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक मांग मजबूत बनी रहती है और नए व्यापार समझौतों का लाभ उद्योगों तक पहुंचता है, तो भारत आने वाले वर्षों में 1 ट्रिलियन डॉलर निर्यात के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ सकता है।
मुख्य बातें
भारत का कुल निर्यात रिकॉर्ड 863 अरब डॉलर पर पहुंचा।
EFTA समझौते के तहत 98% भारतीय निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी।
EFTA देशों ने भारत में 100 अरब डॉलर निवेश का वादा किया।
फार्मा, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और आईटी सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद।
भारत के वैश्विक व्यापार और निवेश आकर्षण में हुई वृद्धि।
