प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के उपरांत ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन से प्रथम बार आमने‑सामने मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने भारत‑ईरान के दीर्घकालिक मित्रता को सुदृढ़ करने और व्यापारिक बास्केट को विस्तारित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों के बीच ऊर्जा निर्यात, विशेषकर तेल और गैस, तथा चाबहार बंदरगाह के संचालन को लेकर कई समझौते पहले ही किए जा चुके हैं, परन्तु अब इन संबंधों को और गहरा करने की इच्छा स्पष्ट हुई।
बैठक में हर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री कर्मियों की सुरक्षा को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। पश्चिमी एशिया में बढ़ती अस्थिरता के मद्देनज़र, भारत ने इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक भूमिका को पुनः स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। दोनों नेताओं ने कहा कि बहुपक्षीय मंचों जैसे ब्रिक्स और एससीओ में सहयोग को बढ़ाकर क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को सुनिश्चित किया जा सकता है।
इसी दौरान मोदी ने पेज़ेश्कियन को भारत में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया और कहा कि ईरान की स्थिति को ब्रिक्स के घोषणा‑पत्र में प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए। यह कदम अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच भारत की आर्थिक स्वायत्तता को बढ़ाने और ईरान के साथ सहयोग को विविधता प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यापारिक आयतन को बढ़ाने के लिए नई परियोजनाओं और निवेशों पर भी विचार किया जाएगा।
