प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीयाम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स के शताब्दी उत्सव में कहा कि 2013 में भारत को विश्व के ‘नाज़ुक पाँच’ देशों में गिना जाता था। उस समय सकल घरेलू उत्पादन की वृद्धि दर गिरावट पर थी, महंगाई लगभग दस प्रतिशत तक पहुँच गई थी और वर्तमान खाते का घाटा ऐतिहासिक ऊँचाई पर था। औद्योगिक क्षेत्र में मंदी का साया था और नीति‑स्थगन की चर्चा हर जगह चल रही थी।

मोदी ने उस दौर की प्रमुख घटनाओं का भी उल्लेख किया। सीमा पर सैनिकों की मौतें, हेलीकॉप्टर सौदे में भ्रष्टाचार का खुलासा और हैदराबाद में बम विस्फोट जैसी घटनाएँ राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता को चुनौती देती थीं। उन्होंने कहा कि इस समय के युवा इन घटनाओं से अनभिज्ञ हो सकते हैं, इसलिए इतिहास को याद रखना आवश्यक है।

वर्तमान में भारत ने आर्थिक विकास, महंगाई नियंत्रण और निर्यात में सुधार के माध्यम से उस नाज़ुक स्थिति से बाहर निकल कर नई ऊँचाइयों को छुआ है। मोदी ने पिछले वर्ष प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव को श्रद्धांजलि देने के अपने अनुभवों को भी याद किया, जहाँ उन्होंने राव जी के आर्थिक सुधारों को भारत की प्रगति के स्तम्भ के रूप में सराहा था। इस प्रकार, मोदी ने यह स्पष्ट किया कि कठिन समय में उठाए गए कदम आज की आर्थिक स्थिरता की नींव बन चुके हैं।