संयुक्त राज्य अमेरिका ने आज दोपहर के समय ईरान के इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड के कई ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सैन्य कमांड ने बताया कि ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा समुद्री खनन स्थापित करने के प्रयास और जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर किए गए मिसाइल प्रहार के जवाब में किए गए थे। इस जलडमरूमध्य को विश्व के तेल परिवहन का प्रमुख मार्ग माना जाता है, इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर सीधा असर पड़ता है।
पिछले दो महीनों में ईरान और संयुक्त राज्य के बीच कई बार संघर्ष की लहरें उठी थीं, जिसमें अमेरिका ने पहले भी ईरान के खिलाफ हवाई हमले किए थे। भारत ने इन घटनाओं को देखते हुए त्वरित डीकैल्सेशन और संवाद की मांग की, जबकि पाकिस्तान ने ईरान को रचनात्मक भूमिका निभाने का आश्वासन दिया। इन देशों के बीच कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद, इस बार के हमले ने क्षेत्रीय तनाव को फिर से बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंता में डाल दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान इस प्रतिक्रिया में फिर से प्रतिशोधी कदम उठाता है तो मध्य पूर्व में एक व्यापक सैन्य संघर्ष की संभावना बढ़ सकती है। इस स्थिति में न केवल तेल निर्यात पर असर पड़ेगा, बल्कि समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस मुद्दे को सुलझाने के लिए तेज़ी से कूटनीतिक संवाद की आवश्यकता है, ताकि इस रणनीतिक जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता बनी रहे।
