वाशिंगटन में अमेरिकी सीनेटरों के एक द्विदलीय समूह ने एक बिल पेश किया है जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले पांच देशों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। इस बिल में भारत और चीन के अलावा स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान भी शामिल हैं। यह बिल दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा तैयार किया गया है और इसमें 15 यूरोपीय देशों को छूट दी गई है जो रूस से गैस खरीदते हैं।

इस बिल का उद्देश्य रूस पर दबाव डालना है ताकि वह यूक्रेन पर हमला बंद कर दे। अमेरिकी सीनेटरों का मानना है कि रूस को तेल बेचने से मिलने वाले पैसे ही उसके सैन्य अभियान को चलाने में मदद कर रहे हैं। इसलिए, यदि रूस को तेल बेचने पर प्रतिबंध लगाया जाए तो वह अपने सैन्य अभियान को जारी रखने में असमर्थ हो जाएगा।

हालांकि, यह बिल अभी तक कानून नहीं बना है और इसके पास होने से पहले कई चरणों से गुजरना होगा। अमेरिकी कांग्रेस में इसका विरोध भी हो सकता है, खासकर उन सीनेटरों की ओर से जो भारत और चीन जैसे देशों के साथ अच्छे संबंध बनाना चाहते हैं। इसलिए, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बिल आगे कैसे बढ़ता है और क्या यह वास्तव में कानून बन पाता है।

इस बिल के पारित होने से भारत पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि भारत रूस से तेल खरीदता है। यदि यह बिल पारित हो जाता है तो भारत पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाया जा सकता है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, भारत को इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ बातचीत करनी चाहिए और अपने हितों की रक्षा करनी चाहिए।